पडरौना। मौसम में हो रहे बदलाव का असर बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है। तेज बुखार, उल्टी-दस्त से पीड़ित मासूमों को लेकर परिजन मेडिकल कॉलेज में उपचार कराने पहुंच रहे हैं। एसएनसीयू में नवजात मरीजों की संख्या के आगे वार्मर भी कम पड़ गया है। एसएनसीयू में 25 बेड पर 71 बच्चों का उपचार चल रहा है। लिहाजा, एक वार्मर पर तीन से चार नवजात शिशुओं को भर्ती किया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि मौसम में हो रहे बदलाव के कारण इस तरह की स्थिति उत्पन्न हुई है।
दिन में उमस भरी गर्मी और आधी रात के बाद हल्की ठंड के कारण तापमान में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इससे बच्चों की सेहत पर असर पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में रोजाना 200 से अधिक मासूम मरीजों को लेकर परिजन उपचार कराने पहुंच रहे हैं। तेज बुखार, उल्टी-दस्त से पीड़ित मासूमों की संख्या अधिक है। शनिवार को चाइल्ड वार्ड भी फुल रहा। एसएनसीयू की स्थिति ऐसी थी कि एक वार्मर पर तीन से चार नवजात शिशुओं को भर्ती कर उपचार किया जा रहा था। पूछने पर स्वास्थ्यकर्मियों ने बताया कि अधिक संख्या होने के कारण वार्मर खाली नहीं हैं। मजबूरी में एक वार्मर पर तीन से चार शिशुओं को भर्ती कर उपचार किया जा रहा है। वहीं, कई परिजन ऐसे भी थे, जो जगह कम होने की जानकारी के बाद अपने नवजात शिशुओं को लेकर मेडिकल कॉलेज से बाहर निकल गए।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनवर ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण शून्य से लेकर 10 वर्ष तक के बच्चे बीमार हो रहे हैं। तेज बुखार, पेट में दर्द और उल्टी-दस्त के मासूम मरीजों को लेकर परिजन उपचार कराने पहुंच रहे हैं। गंभीर रूप से बीमार मासूमों को भर्ती कर उपचार किया जा रहा है। एसएनसीयू में वार्मर भले ही कम है, लेकिन किसी मरीज को लौटाने के बजाय उसे भर्ती कर उपचार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस मौसम में बच्चों की सेहत को लेकर परिजन सतर्कता बरते। थोड़ी सी भी लापरवाही बच्चों की सेहत पर भारी पड़ सकती है। बच्चों को ठंडे पेय पदार्थों से दूर रखें और बाहरी सामान खिलाने से बचे।