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Kushinagar News: राशन वाला गेहूं भी बिकता है मंडी में, विरोध होने पर सक्रिय होते हैं अफसर

Mon, 24 Apr 2023 11:47 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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बोरे और फर्श पर रखा गया गेहूं।संवाद
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- 25 से 30 रुपये किलोग्राम बिकता है कोटे का गेहूं
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संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। कोटे की दुकानों से गरीबों को दिए जा रहे राशन में चावल ही नहीं, गेहूं में भी बड़ा खेल किया जा रहा है। जिन कार्डधारकों को गेहूं की जरूरत नहीं होती है, वे कोटेदार से सीधे सौदा कर लेते हैं। कुछ ऐसे भी हैं, जो कोटे का गेहूं आढ़तियों के हाथ या मंडियों में ले जाकर बेच देते हैं। इतना ही नहीं विद्यालयों में बच्चों को दोपहर के भोजन के लिए मिलने वाले चावल और गेहूं में भी हेराफेरी हो रही है। यह राशन बाजार में खुलेआम बिक रहा है। अगर इस पर विरोध जताया जाता है तो अधिकारी सक्रिय होते हैं अन्यथा सबकुछ शांतिपूर्वक चलता रहता है।
राशन माफिया सीधे मंडियों में गेहूं भेज देते हैं, जिसमें प्रति किलोग्राम चार से पांच रुपये का मुनाफा होता है। इसमें सबकी हिस्सेदारी होती है। जिले में इस तरह राशन का गेहूं ठिकाने लगाने का धंधा एक करोड़ रुपये से अधिक का बताया जाता है। इसमें कोटेदार, दुकानदार और राशन माफिया की संलिप्तता होती है। चूंकि इस समय गेहूं की फसल कटकर लोगों के घर आ गई है। लिहाजा, गेहूं का भाव अब तेजी से नीचे आ रहा है।
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जब गेहूं 22 से 26 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा था, तब राशन वाला गेहूं बेचकर लोग चावल खरीद रहे थे। उसमें भी मुनाफाखोरों को लाभ था। बाजार में दुकानदार बेखौफ होकर राशन वाला मुफ्त गेहूं बेचते हैं। शहर के मेन बाजार सहित मथौली बाजार, दुदही, तमकुहीराज, खड्डा, रामकोला सहित अन्य स्थानों पर कुछ ऐसी दुकानें हैं, जहां यह काम बेरोकटोक चलता है। नाम न छापने की शर्त पर एक दुकानदार ने बताया कि इसके एजेंट सक्रिय हैं। वे राशन वाला गेहूं दुकान तक पहुंचा देते हैं।


27 लाख से अधिक लोगों के लिए मुफ्त में मिल रहा राशन
जनपद में कुल 27,89,932 लाभार्थी हैं, जिनके लिए सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान पर राशन आता है। सरकार इन्हें मुफ्त में राशन उपलब्ध करा रही है, लेकिन बहुत कम लोग हैं जो इसका उपयोग करते हैं। अधिकतर तो मंडियों या दुकानों पर बेच देते हैं। अंत्योदय राशनकार्ड पर 35 किलोग्राम राशन दिया जाता है। इसमें 14 किलोग्राम गेहूं और 21 किलोग्राम चावल होता है। वहीं पात्र गृहस्थी के लाभार्थियों को प्रति यूनिट दो किलोग्राम गेहूं और तीन किलोग्राम चावल दिया जाता है।
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नामांकन अधिक, विद्यालयों में कम होते हैं बच्चे
कुशीनगर जिले में 2,464 परिषदीय और 54 वित्तपोषित, 55 माध्यमिक, 19 राजकीय विद्यालय, 16 समाज कल्याण विभाग की तरफ से संचालित विद्यालय हैं। इनके अलावा तीन मदरसे और एक संस्कृत विद्यालय है। इन विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक के करीब 3.83 लाख बच्चों के दोपहर के भोजन लिए फंड आता है। इसके अलावा इन सरकारी स्कूलों में दोपहर का भोजन बनाने के लिए गेहूं और चावल कोटेदार को दिया जाता है। महीने में 25 दिन स्कूल खुलते हैं। सरकार प्रति छात्र 100 ग्राम के हिसाब से राशन देती है। आईवीआरएस पोर्टल पर जितने बच्चों की उपस्थिति दिखाई जाती है, उतना राशन मिलता है। सारा खेल उपस्थिति में ही है। बच्चों की ज्यादा उपस्थिति दिखाकर अधिकतर स्कूलों के प्रभारी और कोटेदार राशन हथिया लेते हैं और बाद में बेच देते हैं। जानकारों का कहना है कि किसी भी स्कूल में उतने छात्र नहीं आते हैं, जितना मिड डे मील के आंकड़ों में होता है। अगर 25 से 30 फीसदी ही छात्रों के हिस्से में हेराफेरी मान लें तो यह करीब डेढ़ हजार क्विंटल प्रति महीने की है। करीब 30 लाख तक का धंधा आराम से चल जा रहा है।
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