पकवा इनार। भारत तिब्बत समन्वय संघ की कुशीनगर में हुई सांगठनिक बैठक में कैलास मानसरोवर की मुक्ति व तिब्बत की आजादी के अभियान को जनांदोलन का रूप देने का संकल्प लिया गया। इस बात पर सहमति बनी कि तिब्बत की आजादी तभी संभव है, जब भगवान शंकर की जन्म स्थली कैलास मानसरोवर को मुक्त कराने को हर देशवासी संकल्पित हो। इस हेतु जागरूकता का अभियान चलाना होगा।
बुधवार को भारत तिब्बत समन्वय संघ के केंद्रीय परामर्शदात्री समिति सदस्य पूर्व विधायक रजनीकांत मणि त्रिपाठी ने कहा कि जब तक राममंदिर का ताला नहीं खुला तब तक भगवान राम का मंदिर नेपथ्य में रहा। राम मंदिर का ताला खुला, इसके बाद भगवान राम के भव्य मंदिर बनाने की सुगबुगाहट शुरू हुई। फिर देश भर में राममंदिर शिलापूजन अभियान शुरू हुआ। इसके साथ ही यह देशवासियों के लिए आस्था व अस्तित्व का सवाल खड़ा हुआ।
इसके बाद के संघर्षों का परिणाम 22 जनवरी को फलीभूत होगा। इसी प्रकार जब तक भगवान शंकर की जन्म स्थली की मुक्ति के लिए जब तक आम जनमानस चैतन्य नहीं होगा तब तक हमारा संकल्प पूरा नहीं होगा। संघ के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष हनुमान इंटर कालेज पडरौना के प्रधानाचार्य शैलेंद्र दत्त शुक्ल के 14 जनवरी को संघ की स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर कुशीनगर में संगोष्ठी आयोजित करने के प्रस्ताव काे अनुमोदित किया गया। दूसरी ओर भारत तिब्बत समन्वय संघ के केंद्रीय पदाधिकारियों द्वारा उदित नारायण पीजी कालेज की प्राचार्य डॉ. ममता मणि त्रिपाठी को महिला विभाग का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व समाजसेविका कालिंदी त्रिपाठी को प्रतियोगिता प्रभाग का क्षेत्रीय सह संयोजक का दायित्व मिलने पर स्वागत किया गया।
इस दौरान बौद्धिक प्रभाग की क्षेत्रीय सहसंयोजक डॉ. सुनीता पांडेय, महिला विभाग की जिलाध्यक्ष मीनू जिंदल, शोध प्रभाग के क्षेत्रीय सहसंयोजक मनोज शर्मा सारस्वत, जिलाध्यक्ष मूल विभाग संजय शुक्ल, मुख्य जिला संयोजक विजय पांडेय आदि मौजूद रहे।