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त्योहार के उल्लास में धुआं हो गई महंगाई

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पडरौना नगर में कपड़े की खरीदारी करते लोग। - फोटो : KUSHINAGAR
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त्योहार के उल्लास में धुआं हो गई महंगाई
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बाजार में उमड़े लोगों ने दिल खोलकर की खरीदारी, धनतेरस, दिवाली और छठ पर गुलजार है बाजार
पडरौना। खेतों में धान की फसलें उम्मीद के मुताबिक नहीं लहलहा रही हैं। इसके बावजूद धनतेरस, दिवाली और छठ की तैयारी का उल्लास बाजारों में नजर आ रहा है। पिछले साल के मुकाबले सामान के दाम थोड़े बढ़े जरूर हैं, पर कोरोना की वजह से दो साल की कसर ऐसा लग रहा है कि लोग इस साल पूरी कर लेना चाहते हैं। सोना-चांदी हो या बर्तन की दुकानें या फिर साड़ी की ही दुकान, इनमें खरीदारों की भीड़ से ऐसा लग रहा है मानो महंगाई कहीं गुम हो गई है।
इस साल धनतेरस शनिवार व रविवार को रहा। शनिवार को लोहे का सामान छोड़कर अन्य सामान की अधिक ब्रिकी रही। रविवार को महिलाओं ने भी जमकर खरीदारी कीं। ज्वेलरी की दुकानों पर गणेश, लक्ष्मी की प्रतिमा सहित नए-पुराने सिक्कों की ब्रिकी अधिक हुई। छठ की तैयारी को लेकर साड़ी की दुकानों पर महिलाओं की भीड़ अधिक रही। इस बार बाजार में आई नई साड़ी आरगेंजा, शिफॉन, कांजीबरम साड़ी को महिलाओं ने अधिक पसंद किया व खरीदकर घर ले गईं।
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इन साड़ियों की हुई अधिक ब्रिकी
साड़ी का नाम- कीमत रुपये में
नई आरगेंजा- 500 से 2000
शिफॉन- 500 से 3000
बनारसी-500 से 7000
कांजीबरम-500 से 5000 तक
टिस्को-500 से 6000 तक
गिन्नी चू- 1000-4000
लक्ष्मीपति-800-5000
चंदेरी-500-5000
दीपक जलाने के लिए मिट्टी के दिये की अधिक बिक्री हुई
दिवाली पर्व पर दीपक जलाने के लिए रविवार को मिट्टी के दिये की अधिक बिक्री हुई। सादा दीया 150 रुपये में 100, डिजाइन दीया 200 रुपये में 100, कच्चा दीया 200 में 100 पीस, चार पौली 30 रुपये में एक पीस, कलश 30 रुपये, जांता पांच रुपये, गुल्लक छोटा 10 रुपये की दर से बिका।
दिवाली व छठ के लिए महिलाओं की खरीदारी
आज दिवाली और इसके बाद छठ पर्व है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं धनतेरस के पर्व पर रविवार को ही साड़ी व ज्वेलरी खरीदने के लिए बाजार पहुंची हुई थीं। गीता, माधुरी, संगीता, सरिता, सुमन, गरिमा, सीमा सहित अन्य महिलाओं ने कहा कि धनतेरस पर नया सामान खरीदा जाता है। छठ पूजा के लिए साड़ी व ज्वेलरी इसी दिन खरीद लिया गया है। सिलाई कराने में तीन चार दिन का समय लगता है।
मिठाई की हुई ब्रिकी
दिवाली के अवसर पर मिठाई की अधिक ब्रिकी हुई। इसमें मोतीचूर लड्डू 180 रुपये किलो, बेसन बतीसा 440, बेसन मंसूर 500 रुपये, मिल्क केक 450 रुपये प्रति किलो, नारियल लड्डू 320, मिल्क प्रोटीन 300, मेवा बाइट 1200, काजू गजट देशी घी 900, काजू सेंडविज 1150, अंजीर बर्फी 1200 प्रति किलोग्राम की दर से बिक रही है।
बाहुबली पटाखे की अधिक ब्रिकी हुई
दिवाली पर पटाखा फोड़ने के लिए बाजार में अधिक तेज वाला पटाखा दुकानदारों से पूछकर लोग खरीद रहे हैं। इसमें सबसे पंसदीदा पटाखा बाहुबली, हैड्रो बम, आलू बम और स्पेशल गद्दा है।
परिचर्चा-
पिछले साल के सापेक्ष इस साल मिट्टी के दीए की ब्रिकी अधिक हुई है। इसके साथ कलश की बिक्री भी हो रही है। बच्चे जांता अपने परिजनों से खरीदवा रहे हैं।
रामकरण, कुम्हार
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साड़ी के लिए दो दिन से भीड़ अधिक लग रही है। इस बार कारोबार बेहतर होने की संभावना है। बाजार में 500 से लेकर 7000 रुपये तक साड़ी मंगाई गई है। इस साल नई साड़ी में आरगेंजा, शिफॉन, बनारसी की साड़ी महिलाएं अधिक पसंद कर रही है।
राजकुमार टिबड़ेवाल, कपड़ा व्यवसायी
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दो वर्ष कोरोना की वजह से पटाखा की ब्रिकी नहीं हो पाई थी। इस वर्ष पटाखा के लिए उदित नरायण डिग्री में दुकानें लगाई गई हैं। प्रदूषण को नुकसान न करे, ऐसे पटाखों की ब्रिकी की जा रही है।
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राजेश जायसवाल, दुकानदार
दिवाली पर्व को देखते हुए चाय, काफी की बिक्री बंद कर मिठाई बेचने के लिए सभी वर्करों को लगा दिया गया है। इस बार मोतीचूर लड्डू, मिल्क प्रोटीन, बेसन बतीसा की ब्रिकी अधिक हो रही है।
-विशाल मोदनवाल, मिठाई व्यवसायी
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