-किसी बस में टूटे तो किसी में गायब मिले प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स, एक बस में एक्सपायर मिली दर्दनाशक दवा
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। सफर के दौरान रोडवेज बस में आग लग जाए तो फायर यंत्र ढूंढे नहीं मिलेगा। कई बसों में सीट के नीचे बाक्स में इसे रखा गया है तो अधिकतर बसों में एक्सपायर होने के बाद भी नहीं बदला गया है। इतना ही नहीं, अगर बस में सफर के दौरान किसी की तबीयत खराब हो जाए तो भगवान ही मालिक हैं। आपको गाड़ी छोड़कर डॉक्टर ही तलाश करनी पड़ेगी। डिपो की बसों में प्राथमिक उपचार के लिए दवाएं और ओआरएस तक उपलब्ध नहीं है। अफसर भले ही दावा करें कि सारे इंतजाम परिचालक के पास हैं, लेकिन चालक को भी इसकी खबर नहीं है। सोमवार को पड़ताल में अधिकतर रोडवेज बसों का यही हाल रहा।
रोडवेज बसों में सफर करने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए हर बस में फर्स्ट एड बॉक्स लगाया जाता है। ताकि किसी यात्री को चोट लगने या अचानक तबीयत खराब होने पर प्राथमिक तौर पर दवाएं मिल सकें। रोडवेज की अधिकांश बसों में फर्स्ट एड बॉक्स तो है लेकिन, इसमें दवाएं नदारद हैं। पडरौना बस स्टैंड पर 11:40 बजे गोरखपुर, देवरिया और कसया जाने के लिए खड़ी पांच बसों में फर्स्ट एड बॉक्स था। एक बस में दर्दनाशक दवा और रूई रखी थी। दवा एक्सपायर हो गई थी। बाकी चार बसों के फर्स्ट एड बॉक्स में पेपर और पान मसाला रखा था। इनमें दो बसें पडरौना डिपो की और एक देवरिया और दो गोरखपुर डिपो की थीं। दोपहर में 1:54 बजे कसया बस स्टेशन पर गोरखपुर डिपो की दो बसें खड़ी थीं। एक बस में 12 और दूसरी में नौ यात्री बैठे थे। फर्स्ट एड बाक्स और फायर यंत्र के बारे में पूछने पर कंडक्टर रामाज्ञा और शिव कुमार ने बताया छह माह से इस बस पर चल रहा हूं। तब से फायर यंत्र और फर्स्ट एंड बाक्स में दवा नहीं है। चालक को इसके बारे में जानकारी होगी। कंडक्टर ने बताया कि गर्मी में यात्रियों की तबीयत तो सफर के दौरान बिगड़ती ही है। लेकिन, ओआरएस या दवा विभाग की ओर से मिलेगी, तब न दी जाएगी। अपने पास से कंडक्टर या चालक नहीं देंगे।
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यात्री बोले
-गर्मी इतना है कि बस में सफर के दौरान प्यास लगने पर पानी तो मिलती ही नहीं है। ओआरएस कौन पूछे। फर्स्ट एंड बाक्स में दवा की जगह पान मसला चालक रख रहे हैं। रोडवेज के जिम्मेदारों को इस पर ध्यान देना चाहिए। -रमेश, यात्री कसया
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बसों में फायर यंत्र नहीं हैं। आग लगने पर जान बचाना मुश्किल हो जाएगा। बस कंडक्ट को भी इस पर ध्यान देना चाहिए। अफसरों को इसकी समय-समय पर जांच कर लापरवाह कर्मचारियों पर कार्रवाई करनी चाहिए। -रामसरन यात्री कसया
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-बस में फायर यंत्र और फर्स्ट एड बाक्स सिर्फ नाम का है। सफर के दौरान किसी भी यात्री की तबीयत बिगड़ सकती है। इसलिए बस में दवा की उपलब्धता होनी चाहिए। लेकिन, इसको लेकर कंडक्टर गंभीर नहीं हैं। -गोविंद यात्री पडरौना
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पडरौना बस स्टैंड पर बैठने की सुविधा तो है ही नहीं। सड़क पर खड़ा होकर आधे घंटे इंतजार के बाद बस मिली है। बस में जो सुविधा मिलनी चाहिए, वह यात्रियों को नहीं मिल पा रही है। -मुनीब यात्री पडरौना
-सभी बसों में फर्स्ट एड बॉक्स की सुविधा है। बसों में लगा बाक्स टूट जाता है। इसलिए चालक को दवाएं उपलब्ध करा दी जाती हैं। जरूरत पड़ने पर यात्रियों को इसका लाभ मिलता है। यदि कुछ बसों में नहीं है तो उसे दिखवा लिया जाएगा। फायर यंत्र को सामने रखना चाहिए। ताकि आग लगने पर इसका उपयोग किया जा सके। अगर चालक इसे सीट के नीचे डिकी में रख रहे हैं तो गलत है। -राकेश कुमार, एआरएम पडरौना