दहेज हत्या के दोषी पति को दस और ससुर को आठ साल की सजा
- अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर-दो ने सुनाया फैसला
पडरौना। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर-दो नेदहेज हत्या के दोषी पति को दस साल और ससुर को आठ साल की सजा सुनाई गई है। इनके ऊपर 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
देवरिया जिले के सलेमपुर कस्बा निवासी भगवान प्रसाद की ओर से इस मुकदमे की पैरवी कर रहे जिला शासकीय अधिवक्ता गोरख प्रसाद यादव ने बताया कि भगवान प्रसाद नाम के व्यक्ति ने वर्ष 1995 में सेवरही थाने में तहरीर देकर बताया था कि उन्होंने पुत्री शांति की शादी घटना से चार साल पूर्व सेवरही निवासी बैकुंठ के पुत्र त्रिलोकीनाथ से की थी। उनका आरोप था कि ससुराल वाले दहेज में रंगीन टीवी और वीसीआर की मांग की जाती थी। उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता था। 13 अप्रैल 1995 को उन्हें सूचना मिली कि उनकी पुत्री शांति को उसकी सास मालती, ससुर बैकुंठ, देवर अशोक, मनोज तथा ननद सीमा ने मारपीट कर हत्या कर दी और शव को जला दिया। पुलिस ने तहरीर के आधार पर दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में भेज दिया था। तभी से यह मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन था।
बृहस्पतिवार को इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट नंबर-दो श्याम मोहन जायसवाल के न्यायालय में हुई। सुनवाई के दौरान पाया गया कि मृतका की सास मालती देवी की मौत हो चुकी है। पति त्रिलोकीनाथ को दस वर्ष का सश्रम कारावास व 25,000 रुपये अर्थदंड तथा ससुर बैकुंठ को आठ वर्ष का सश्रम कारावास व 25,000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। अन्य आरोपी नाबालिग थे। देवर और ननद घटना के समय नाबालिग थे। इसलिए उनका मुकदमा जुवेनाइल कोर्ट (किशोर न्यायालय) में चल रहा है।