थानों से लापता मानवाधिकार, तलाशते रह जाएंगे बोर्ड
- निरीक्षण के दौरान अधिकारियों का इस ओर नहीं जाता है ध्यान
- बोर्ड नहीं लगने से आम लोगों को नहीं हो पाती है जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। जनपद के अधिकतर थानों में मानवाधिकारों के बारे में जानकारी देने वाले बोर्ड नजर नहीं आते हैं। कहीं लगे भी हैं तो कोने पर रख दिए गए हैं ताकि किसी की नजर नहीं पड़े। थाने का निरीक्षण अधिकतर एसपी धवल जायसवाल करते हैं, लेकिन उनके निरीक्षण में थानेदार इसे छिपा ले जाते हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने मानव अधिकार को लेकर आदेश जारी किया है कि थानों पर आए व्यक्ति के साथ मारपीट अथवा अमानवीय व्यवहार नहीं किया जाएगा। यह लाइन हर थाने की दीवारों पर लिखा होना चाहिए। निरीक्षण के दौरान पुलिस के अधिकारी भी नहीं देते हैं इस पर ध्यान।
शनिवार को अमर उजाला की टीम ने जनपद के थानों पर पड़ताल की तो अधिकतर थानों पर मानवाधिकार का बोर्ड नहीं लगा था। वहीं कुछ कार्यालय के पास लिखा हुआ है। जिस पर फरियादियों की नजर नहीं पड़ सके। महिला थाने पर मानवाधिकार का बोर्ड नहीं लगा है, यहां तैनात एक महिला पुलिसकर्मी से पूछने पर वह भौचक रह गईं कि यह क्या होता है। उसने बताया कि थानाध्यक्ष तहसील दिवस में गई हैं, उन्हें जानकारी होगा। हाटा कोतवाली में थाने के कार्यालय के कंप्यूटर कक्ष के पास बोर्ड लगा है, इस पर किसी की नजर नहीं पड़ती है। खड्डा थाने में दीवार पर लिखा हुआ मिट गया है। रामकोला, तमकुहीराज, खड्डा, कप्तानगंज, तरयासुजान सहित अन्य थानों पर मानवाधिकार का बोर्ड नहीं लगा है।
यह है सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश
थानों में मानवाधिकार के निर्देश का बोर्ड लगाने का निर्देश है। उसमें यह बताया जाता है कि जो भी व्यक्ति थाने में आए तो उसके अधिकार क्या-क्या हैं। थानों में आने वाले व्यक्तियों को पुलिस की ओर से क्या-क्या सुविधा दी जाती है, गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को कब तक न्यायालय में भेजने का निर्देश हैं। पुलिस रिमांड पर लिए गए व्यक्ति के साथ किस तरह का व्यवहार पुलिस करेगी। प्रत्येक व्यक्ति को गिरफ्तारी के बाद उसके परिचित या परिवार के सदस्य को जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा भी अन्य मानव अधिकार के बताए गए हैं।
बोले जानकार
अधिवक्ता एके पांडेय ने बताया कि हर थानों पर बड़ी होर्डिंग में मानवाधिकारों से संबंधित जानकारी लिखी होनी चाहिए। बोर्ड नहीं लगने से जानकारी के अभाव में लोगों को अधिकारों की जानकारी नहीं हो पाती है।
हाईकोर्ट लखनऊ के अधिवक्ता सुनील त्रिपाठी ने बताया कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के गाइड लाइन के अनुसार सूर्योदय से पहले व सूर्यास्त के बाद से किसी महिला की गिरफ्तारी नहीं की जा सकती। 24 घंटे के अंदर मुलजिम को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना होता है। थाने में निरुद्ध बंदी को उसके वकील से मिलने से भी नहीं रोका जा सकता। प्रत्येक बंदी को अपने घर फोन करने का अधिकार है।
वर्जन
थानों पर मानवाधिकार के बोर्ड नहीं लगाए गए है, तो इस पर विविध कार्रवाई की जाएगी। थानाध्यक्षों को निर्देश दिया जाएगा कि थाने पर बोर्ड गेट के सामने लगवा दें।
धवल जायसवाल, एसपी कुशीनगर