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Kushinagar News: बिना पंजीकरण और डिग्री हॉस्पिटल संचालक करता था सर्जरी, केस

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पडरौना। नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र के कोटवा बाजार में खुशी हॉस्पिटल पांच महीने से बिना पंजीकरण के ही संचालित हो रहा था। लेटर पैड पर नौ डॉक्टरों के नाम दर्ज थे लेकिन संचालक बिना किसी डिग्री और प्रशिक्षण के खुद ही मरीजों का इलाज और ऑपरेशन करता था। भर्ती मरीजों की बीएचटी पर न तो एनेस्थिसिया के डॉक्टर के हस्ताक्षर मिले और न ही किसी सर्जन के। जांच में इस बात की पुष्टि होने के बाद संचालक के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने गंभीर धाराओं में केस दर्ज कराया है।
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क्षेत्र के एक व्यक्ति ने आयुष्मान भारत योजना के मुख्य कार्यपालक अधिकारी और मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर खुशी हॉस्पिटल की जांच की मांग की थी। बताया था कि आयुष्मान भारत योजना में भी यह हॉस्पिटल सूचीबद्ध है। शिकायतकर्ता ने डॉक्टरों के फर्जी पंजीकरण, आयुष्मान लाभार्थियों की फर्जी रिपोर्ट तैयार करने व गलत तरीके से उपचार का आरोप लगाया था। आयुष्मान योजना में फर्जीवाड़े के आरोप में जेल में बंद डीपीसी डॉ. दीपक कुशवाहा व आईएसएडीसी अखिलेश विश्वकर्मा की भी संलिप्तता का संदेह जताया था।



उच्चाधिकारियों के निर्देश पर नेबुआ नौरंगिया सीएचसी के अधीक्षक डॉ. रजनीश श्रीवास्तव ने टीम के साथ जांच की। जांच में मिली कमियों के बाद संचालक को नोटिस दिया गया तो संतोषजनक जवाब नहीं मिला। सीएमओ डॉ. सुरेश पटारिया को भेजी गई रिपोर्ट में जांच टीम ने बताया कि हॉस्पिटल का पंजीकरण नहीं है। भर्ती मरीजों की बीएचटी पर न तो सर्जन के हस्ताक्षर मिले और न ही एनेस्थिसिया के डॉक्टर के। मरीज के अंगूठे का निशान भी प्रमाणित नहीं मिला। नेबुआ नौरंगिया थाने के इंस्पेक्टर हर्षवर्धन सिंह ने बताया कि एमओआईसी की तहरीर पर खुशी हॉस्पिटल के संचालक राजू श्रीवास्तव के खिलाफ बीएनएस की गंभीर धाराओं के साथ इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट-1956 के तहत केस दर्ज किया गया है।
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नौ चिकित्सकों का नाम दिखाकर किया भ्रमित
जांच रिपोर्ट में बताया गया कि हॉस्पिटल के लेटर पैड पर नौ चिकित्सकों के नाम दिखा कर लोगों को भ्रमित किया जा रहा है। चिकित्सक के नाम के स्थान पर डॉ. खुशी हास्पिटल लिखा गया है। जांच में यह भी पता चला कि 40 वर्षीय गुड्डी देवी पत्नी जितेन्द्र यादव निवासी ग्राम सिंगहा के बच्चेदानी का ऑपरेशन व 25 वर्षीय सुनीता देवी पत्नी अर्जुन चौरसिया निवासी बलकुड़िया बाजार के बच्चेदानी व पित्त की थैली का ऑपरेशन एक साथ किया गया। बीएचटी में एनेस्थिसिया नोट्स में मरीज के पति का हस्ताक्षर है।

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मरीजों की जिंदगी से करता रहा खिलवाड़
बिना किसी डिग्री के सर्जरी करते हुए संचालक का फोटोग्राफ व वायरल वीडियो भी जांच रिपोर्ट में शामिल है। जांच टीम ने बताया कि हॉस्पिटल संचालक ने खुद ही ऑपरेशन किए हैं। जबकि उसके पास किसी प्रकार की चिकित्सकीय डिग्री नहीं है, जो क्लीनिकल स्टेब्लिशमेंट एक्ट-2010 के नियमों का खुला उल्लंघन है। हॉस्पिटल के डिस्प्ले बोर्ड पर दर्ज चिकित्सकों से इलाज न कराकर बिना डिग्री वाले अनधिकृत व्यक्तियों से और खुद मरीजों का इलाज किया जाता है, जो मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ है।

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मार्च के बाद खुशी हॉस्पिटल के पंजीकरण का नवीनीकरण नहीं कराया गया। ऑनलाइन आवेदन में त्रुटियां मिली थीं, जिसके चलते नवीनीकरण नहीं हो सका था। पूर्व में भी यह हॉस्पिटल सील किया गया था। बिना पंजीकरण अस्पताल के संचालन और डॉक्टर की जगह संचालक द्वारा खुद बिना किसी डिग्री और प्रशिक्षण के इलाज व सर्जरी किए जाने पर एमओआईसी ने केस दर्ज कराया है। - डॉ. आरडी कुशवाहा, एसीएमओ
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