-एक माह से गायब है आरोपी आलाउद्दीन, सीएमओ कार्यालय में संविदा पर तैनात एक कर्मी का बताया जा रहा करीबी
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। डॉक्टरों की फर्जी डिग्री तैयार बेचने वाले तमकुहीराज के अलाउद्दीन के अस्पताल पर लगे बोर्ड से उसका नाम स्वास्थ्य विभाग की टीम ने हटवा दिया है। गोरखपुर पुलिस ने करीब एक माह पूर्व अलाउद्दीन की तलाश में दबिश दी थी। तभी से आरोपी फरार है। उसकी सभासद पत्नी अस्पताल का संचालन करती थी। सीएमओ कार्यालय में लंबे समय से संविदा पर तैनात एक कंप्यूटर ऑपरेटर के करीबी होने के कारण स्वास्थ्य विभाग की टीम उसके अस्पताल पर कार्रवाई करने से कतरा रही थी। डीएम की सख्मी के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने एक माह बाद अस्पताल को सील कर जांच शुरू की है।
तमकुहीराज नगर निवासी अलाउद्दीन की तलाश गोरखपुर पुलिस सरगर्मी से कर रही है। वह एक माह से फरार है। वह अवैध रूप से अपने घर में हाईवे के किनारे अस्पताल चल रहा था और डॉक्टरों की फर्जी डिग्री भी तैयार करता है। इसकी जानकारी होने के बाद गोरखपुर पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू किया, लेकिन कुशीनगर सीएमओ कार्यालय के एक कंप्यूटर ऑपरेटर के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों तक नजदीकी बनाने वाले अलाउद्दीन की डिग्री फर्जी होने के बाद भी अस्पताल पर कार्रवाई करने से स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार मुंहमोड़ रहे थे।
इसकी जानकारी डीएम उमेश मिश्रा तक पहुंची, डीएम की सख्ती के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची और उसकी पत्नी को विश्वास में लेने के बाद बोर्ड पर लगा अलाउद्दीन का नाम हटवाते हुए अस्पताल सील किया। इसकी चर्चा विभागीय कर्मचारियों के अलावा इलाके में जोरों पर है। सूत्रों की मानें तो एक महिला कर्मचारी का बेटा सीएमओ कार्यालय में संविदा पर तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर का अलाउद्दीन करीबी है। इसके चलते जिम्मेदार अस्पताल पर कार्रवाई नहीं कर रहे थे। अवैध रूप से सुकरौली, हाटा, समेत जिले में अवैध रूप से चल रहे अल्ट्रासाउंड सेंटर और निजी अस्पताल में पार्टनर भी है। विभागीय पैठ मजबूत होने के कारण कंप्यूटर ऑपरेटर के कार्यों में कोई दखलअंदाजी भी नहीं करता है। चर्चा है कि विभागीय एक अधिकारी की इसके ऊपर इतनी मेहरबानी है कि इसके एक इशारे पर सीएमओ कार्यालय के बाबुओं काे बदल दिया जाता है।