लक्ष्मीगंज। अभ्युदय अंतरराष्ट्रीय संस्था के उत्तर प्रदेश इकाई की तरफ से हिन्दी पखवाड़ा के तहत शुक्रवार को ऑनलाइन गोष्ठी हुई। इसमें हिन्दी : राष्ट्रभाषा होने की संभावनाएं और चुनौतियां विषय पर चर्चा की गई।
संस्था अध्यक्ष डॉ. इंदू झुनझुनवाला ने कहा कि सबको समग्र रुप से हिन्दी को राष्ट्रभाषा स्वीकार करनी चाहिए। लंदन से जुड़ी ई-पत्रिका की संपादिका शैल अग्रवाल ने कहा की हिन्दी भाषा की अनेकानेक बोलियों में वर्चस्व की लड़ाई है। सुनील चौरसिया सावन ने कहा कि हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनने की पूरी संभावना है। हिन्दी भावात्मक भाषा है। अध्यक्षता करते हुए सुरेन्द्र कुमार पाठक ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्पर्क भाषा के रूप में अंग्रेजी से मुकाबले हिन्दी राष्ट्रभाषा बनेगी। गोष्ठी को प्रोफेसर रचना शर्मा, डॉ. संगीता श्रीवास्तव, डॉ. मंजरी पांडेयस्नेह लता , डॉ. किरन सहाय , डॉ. नीलम सिंह और प्रोफेसर रचना शर्मा आदि ने संबोधित किया।
इस दौरान ज्योति तिवारी, साहित्यकार यशपाल सिंह ,चंदा प्रहलाद,बीएल प्रजापति आदि श्रोता मौजूद रहे।