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Kushinagar News: खड्डा क्षेत्र में इस साल जून-जुलाई में हुई जमकर बारिश

Sun, 04 Aug 2024 04:01 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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खड्डा। तहसील क्षेत्र में जून व जुलाई में इस साल जमकर बारिश हुई है। पंद्रह वर्ष बाद इस जुलाई में 600 मिली मीटर से ज्यादा बारिश हुई है। पिछले वर्ष बरसात के चार महीनों में कुल 1187 मिमी बारिश के सापेक्ष इस वर्ष डेढ़ माह में ही 774 एमएम बारिश हो चुकी है। क्षेत्र में दो व तीन जुलाई को दो दिन में ही 338 एमएम बारिश हुई थी। नेपाल में बारिश ने गंडक नदी में बाढ़ ला दिया और जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया। कई गांवों में पानी भर गया, लोगों को दिक्कत उठानी पड़ी।
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नेपाल से निकली गंडक नदी खड्डा क्षेत्र में बहती है। इसके सटे बिहार का 885 वर्ग किमी में फैला वाल्मीकि टाइगर रिजर्व का जंगल एवं महराजगंज जनपद का सोहगीबरवा वन्यजीव अभयारण्य है। नेपाल का चितवन नेशनल प्राणी उद्यान भी ज्यादा दूर नहीं है। मानसून के समय हर वर्ष बारिश का उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।
किसी वर्ष अत्यधिक वर्षा से बाढ़ आ जाती है तो किसी सूखा पड़ जाता है। वर्ष 2003 के जुलाई माह में 849.6 एमएम, वर्ष 2007 मे 963.0 एमएम, वर्ष 2008 में 604.8 एमएम बारिश हुई थी। इसके बाद जुलाई में बारिश कम होती रही, वर्ष 2017 में मात्र 166 एमएम वर्षा रिकॉर्ड हुई थी। इस वर्ष 15 जून से बरसात का सीजन शुरू होते ही बारिश ने जोर पकड़ लिया। इस वर्ष जून में 162.0 एमएम, जुलाई में 612 एमएम वर्षा हो चुकी है। शुरुआती डेढ माह में ही 774 एमएम बारिश रिकॉर्ड हुई है। जबकि पिछले वर्ष जून में 90 एमएम, जुलाई में 309 एमएम बारिश हुई थी। पिछले वर्ष चार माह में कुल 1187 एमएम बारिश हुई थी। वर्ष 2009 के जून में मात्र 16 एमएम, वर्ष 2010 के जून में 65.8 एमएम, 2017 में 65 एमएम, 2020 में 68.03 एमएम व पिछले वर्ष 2023 में मात्र 90 एमएम वर्षा हुई थी। परंतु 2006 जून में 514 एमएम, 2021 के जून में 415.8 एमएम बारिश हुई थी।
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नेपाल में जबरदस्त बारिश से गंडक में आई थी बाढ़

इस वर्ष नेपाल में जबरदस्त बारिश के चलते गंडक नदी में बाढ़ आ गई। नदी खतरे के निशान 96.00 मीटर से 22 सेमी ऊपर पहुंच गई। बाढ़ प्रभावित मरचहवा, बसंतपुर, शिवपुर, हरिहरपुर, नरायनपुर, विंध्याचल पुर, सालिकपुर, महदेवा आदि गांव बाढ़ की चपेट में आ गए। जबकि पिछले वर्ष बाढ़ नहीं थी। चक्रवाती तूफान ने केला किसानों की कमर तोड़ दी तो सैकड़ों पेड़ व घर धराशायी हो गए। कई दिनों तक विद्युत सप्लाई ठप रही। हर वर्ष बरसात में लोगों को अलग-अलग तरह की समस्याओं से जूझना पड़ता है।
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जुलाई में हुई बारिश
2001 494.6 मिमी

2002 374.8 मिमी

2003 849.6 मिमी

2004 307.4 मिमी

2005 403.0 मिमी

2006 359.0 मिमी

2007 963.0 मिमी

2008 604.8 मिमी

2009 426.8 मिमी

2010 376.2 मिमी

2011 383.0 मिमी

2012 428.8 मिमी

2013 227.2 मिमी

2014 358.0 मिमी

2015 269.6 मिमी

2016 304.6 मिमी

2017 166.0 मिमी

2018 401.0 मिमी

2019 415.4 मिमी

2020 441.4 मिमी

2021 475.0 मिमी

2022 315.8 मिमी

2023 309.0 मिमी
2024 612.0 मिमी

_______________________
जून माह में हुई बारिश

2001 177.0 मिमी
2002 278.8 मिमी

2003 348.0 मिमी

2004 223.4 मिमी

2005 106.4 मिमी

2006 514.4 मिमी

2007 189.6 मिमी

2008 367.0 मिमी

2009 16.0 मिमी

2010 65.8 मिमी

2011 117.6 मिमी

2012 131.4 मिमी

2013 383.6 मिमी

2014 256.0 मिमी

2015 230.6 मिमी

2016 222.0 मिमी

2017 65.0 मिमी

2018 110.2 मिमी

2019 167.4 मिमी

2020 68.3 मिमी

2021415.8 मिमी

2022 172.0 मिमी

202390.0 मिमी

2024163.0 मिमी।।

स्रोत-केंद्रीय जल आयोग।
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