कप्तानगंज। कप्तानगंज सीएचसी में सुविधाओं का आभाव है। इसके कारण मरीज निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। सीएचसी में डॉक्टरों की जरूरत के हिसाब से तैनाती है। पर, इनके आने-जाने का कोई समय नहीं है। वहीं सोमवार को तीन डॉक्टर ड्यूटी पर ही नहीं आए। आसानी स्वास्थ्य सुविधा मिले इसके लिए सरकार ने हेल्थ एटीएम लगाया था। लेकिन यह अभी तक शुरू नहीं हो सका।
सीएचसी की सोमवार को सुबह 10:10 बजे पड़ताल किया। उस समय ओपीडी के लिए 20 पर्ची बने थे। डाॅक्टर मरीज को देखते हुए मिले, लेकिन डाॅ. गोपाल मद्धेशिया, डाॅ. रेनू मिश्रा और डाॅ. पिक्की जोशी अनुपस्थित रहीं। सीएचसी में प्रतिदिन करीब 300 मरीज इलाज कराने आते हैं। मरीजों की बीमारियों की जांच के लिए एक्सरे, अल्ट्रासाउंड और जांच के लिए अन्य अत्याधुनिक सुविधा नहीं होने की वजह से लोग पडरौना और गोरखपुर चले जाते है। कई मरीज को कस्बा के अन्य निजी अस्पताल चले जाते हैं, जहां मामूली जांच और इलाज के नाम पर उन्हें मोटी रकम चुकानी पड़ती है। अस्पताल में हेल्थ एटीएम मशीन करीब दो माह पूर्व लगाई गई थी, लेकिन इसमे लगी मशीन की अभी तक शुरूआत नहीं हो सकी।
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बिना महिला डॉक्टर के कैसे हो प्रसूताओं का आपरेशन
प्रसूता महिलाओं को निशुल्क ऑपरेशन करने के लिए अस्पताल में पूरी व्यवस्था है। यहां महिला सर्जन की नियुक्ति भी है, लेकिन लापरवाही की वजह से इस महीने में अभी तक केवल एक ही प्रसूता का ऑपरेशन हुआ है। हालांकि डिलीवरी वार्ड में प्रतिदिन दो से तीन प्रसूता इलाज के लिए आती हैं। कप्तानगंज में प्रसूता के ऑपरेशन की संख्या का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हर माह कप्तानगंज में कोई न कोई अस्पताल सील किया जाता है। उस दौरान प्रसव वाली महिलाओं की संख्या वहां दो से तीन मिलती है।
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पार्किंग की व्यवस्था नहीं
अस्पताल में पार्किंग की व्यवस्था नही है। इसकी वजह से एंबुलेंस पर तैनात स्वास्थ्य कर्मचारी मरीज को अस्पताल लेकर जाने से कतराते हैं। अस्पताल का पुराना भवन कंडम घोषित हो चुका है। इसके बावजूद अभी तक उसे तोड़ा नहीं गया है। इसकी वजह से अस्पताल में परिसर में जगह कम है।
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तीन बेड का बना है मिनी पीआईसीयू
मिनी पीआईसीयू में तीन बेड भरे मिले। इसमें तेज बुखार और पेटदर्द से पीड़ित सात वर्ष के सुमीत, बुखार से पीड़ित आठ वर्षीय सलोनी और सात वर्ष के अस्मित मिले। पीआईसीयू में स्टाॅफ नर्स रमेश यादव और बबिता यादव की ड्यूटी थी। रमेश यादव ने बताया की स्टाॅफ कम होने के कारण 24 घंटा लगातार ड्यूटी करना पड़ता है।
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अस्पताल के तीन डॉक्टर अनुपस्थित हैं। उन्होंने छुट्टी नहीं लिया हैं। हेल्थ एटीएम मशीन को लेकर विभाग और लगाने वाले कंपनी को चालू करने के लिए पत्र कई बार भेजा गया है। प्रसूता के ऑपरेशन को लेकर आने वाले मरीजों को बताया जाता है। अस्पताल परिसर में स्थित पुराने भवन को तोड़ने के लिए विभाग की तरफ से कार्रवाई की जा रही है।
- डॉ. रितेश कुमार सिंह, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, कप्तानगंज।