बहोरा रामनगर गांव में हैंड पंप की जांच करते डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी।
मंसाछापर। डीपीआरओ ने विशुनपुरा ब्लॉक की दो ग्राम पंचायतों की जांच की। जांच में वित्तीय अनियमितता और फर्जीवाड़ा पकड़ में आया है। बहोरा रामनगर गांव में हैंडपंप रिबोर के नाम पर दो लाख रुपये खर्च दिखाया गया है लेकिन, रिबोर नहीं कराया गया है। इस मामले में जिम्मेदारों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है।
शुक्रवार की देर शाम डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी बहोरा रामनगर गांव पहुंचे। वित्तीय वर्ष 2022-23 में ग्राम पंचायत में सात हैंडपंपों के रिबोर पर लगभग दो लाख की धनराशि व्यय की गई थी। डीपीआरओ के सत्यापन में लोगों ने बताया कि केवल एक हैंडपंप का ही रिबोर कराया गया है, शेष छह हैंडपंपों की धनराशि बिना रिबोर कराए ही निकाल ली गई है। डीपीआरओ ने सचिव और ग्राम प्रधान से इस बारे में पूछा तो कोई अभिलेख नहीं दिखा पाए। डीपीआरओ ने जिम्मेदार अधिकारियों को फटकार लगाई। गांव में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए लगभग आठ लाख रुपये आवंटित किए गए हैं, लेकिन अब तक मात्र 1,70,000 रुपये ही व्यय किए गए। आरआरसी के लिए भूमि अब भी उपलब्ध नहीं हो पाई है।
चितहां गांव के निरीक्षण में पंचायत भवन जर्जर स्थिति में मिला। सामुदायिक शौचालय भी क्षतिग्रस्त मिला। इसके परिसर में गंदगी फैली थी। लोगों ने बताया कि केयरटेकर की तरफ से साफ-सफाई नहीं कराई जाती है। इसे गंभीरता से लेते हुए डीपीआरओ ने सामुदायिक शौचालय के केयरटेकर की सेवाएं समाप्त कर इसकी तत्काल मरम्मत कराने के निर्देश दिए।
जांच में सामने आया कि ग्राम पंचायत में ब्रॉडबैंड डोंगल एवं ऑनलाइन उपस्थिति के उपकरण के नाम पर धनराशि आहरित किया गया है। डीपीआरओ ने सचिव और ग्राम प्रधान पर नाराजगी जताते हुए कार्रवाई की बात कही। डीपीआरओ ने बताया कि दोनों ग्राम पंचायतों में कई अनियमितताएं मिली हैं। किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।