आधा-अधूरा निकाला प्रशासन का भूमि विवाद निस्तारित करने का दावा
दस दिनों में 5000 जमीन के मामलों के निस्तारण का किया गया है दावा
चार केस के पड़ताल में चारों ही विवाद का निस्तारण मिला आधा-अधूरा
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। देवरिया में सामूहिक हत्याकांड के बाद शासन ने भूमि विवाद के मामलों को जल्द निस्तारित करने का आदेश दिया तो प्रशासन ने तेजी दिखाई है। प्रशासन का दावा है कि पिछले दस दिनों में 5000 मामलों का निस्तारण किया गया है। वहीं, जनवरी से अब तक भूमि विवाद के 56,807 मामलों में से 52,228 का निस्तारण किया गया है। निस्तारित किए गए चार मामलों की शनिवार को हकीकत जानने की कोशिश की गई तो आधा सच और आधा झूठ सामने आया। मामलों के निस्तारण के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई है। इन चार मामलों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि बाकी मामलों का निस्तारण किस तरह से किया गया होगा।
जंगल सिंगापट्टी गांव के चार लोगों से बात की गई तो पता चला कि उनका मामला आधा निपटाया गया है। चारों लोगों को पट्टे पर जमीन मिली है। कब्जा अब तक नहीं हो पाया है। मामला तहसील में चल रहा है। अब केस निस्तारित करने के नाम पर किसी को दो तो किसी को ढाई कट्ठा जमीन पर कब्जा दिलाया गया है। शेष जमीन दिलाने का केवल आश्वासन दिया गया है। एक मामले में तो जितनी जमीन पर कब्जा दिलाया गया है वह भी कब्जा करने वाला छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। धमकी अलग से दे रहा है। तय है कि अब यह मामला फिर से तहसील में जाएगा। एक तरह से निस्तारण का कोई फायदा पीड़ित को नहीं मिला है।
इसी तरह जंगल शाहपुर निवासी अक्सीन व शाहजहां जंगल हनुमानगंज निवासी राबिया व एनुल के बीच कायमी का मुकदमा तहसीलदार कोर्ट में चल रहा था। इस मामले में तहसीलदार ने वादी के पक्ष में फैसला दिया है। मामले में जुगल हनुमानगंज के प्रतिवादी ने उच्चाधिकारियों की अदालत में अपील करने की बात कही है।
वहीं, जंगल अमवा निवासी ज्ञानती, भरत व जंगल और कुरमौल निवासी फुलवा व विश्वनाथ के बीच वर्ष 2021 से बैनामे की जमीन को लेकर विवाद था। इसका वाद तहसीलदार कोर्ट में चल रहा था। इस सप्ताह इस पर वादी के पक्ष में फैसला हो गया। इस फैसले से दोनों पक्ष संतुष्ट बताए जा रहे हैं। फैसले के बाद वादी का भूमि पर कब्जा हो गया है।
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पांच में से दो कट्ठा जमीन पर कब्जा दिलाया
पांच कट्ठा खेती के लिए पट्टा मिला था, लेकिन कब्जा नहीं हो पाया था। काफी भागदौड़ के बाद भी कब्जा नहीं मिला तो तहसील में वाद दाखिल किया। बीते सप्ताह वाद को निस्तारित कर तहसील प्रशासन ने दो कट्ठा भूमि पर कब्जा दिला दिया है। शेष तीन पर शीघ्र कब्जा दिलाने का आश्वासन दिया है।
- छेदी प्रसाद, निवासी, जंगल सिंगापट्टी
-तीन कट्ठे पर कब्जा दिलाने का मिला आश्वासन
मेरे पति रामाशीष के नाम से चार कट्ठा पट्टा आवंटित हुआ था। कब्जा नहीं मिलने के कारण इसका न्यायालय में वाद चल रहा था। पांच दिन पहले लेखपाल व पुलिसकर्मी आए और दो कट्ठा भूमि पर कब्जा दिलाकर चले गए। बाकी बची भूमि पर कब्जे के बारे में पूछने पर उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही उसे भी दिला दिया जाएगा।
- भांति देवी, निवासी, जंगल सिंगापट्टी
मेरे ससुर शनीचर के नाम से पांच कट्ठा जमीन पट्टे की मिली थी। कई साल तक तहसील के चक्कर लगाने के बाद करीब पांच दिन पहले ढाई कट्ठा जमीन पर कब्जा दिलाया गया है। इस जमीन पर पूर्व में जिसका कब्जा है वह सागौन का पेड़ लगाए है। अब वह पेड़ नहीं काटने की धमकी दे रहा है। इस तरह मामला वहीं का वहीं रह गया है।
- उर्मीला देवी, निवासी, जंगल सिंगापट्टी
-मेरे पिता के नाम से कई वर्ष पहले पांच कट्ठा जमीन पट्टे पर मिली थी, लेकिन उस पर कब्जा नहीं मिल रहा था। इसके लिए तहसील में मुकदमा चल रहा था। चार दिन पहले ढाई कट्ठा जमीन पर कब्जा मिल गया है। शेष जमीन पर कब्जा दिलाने का अशवासन दिया गया है। देखिए कब कब्जा दिलाया जाता है।
- शारदा, निवासी, सिंगापट्टी
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तहसील कार्यालय या न्यायालय में आए वाद और शिकायतों के निस्तारण में प्रशासन गंभीर है। दोनों पक्षों की तरफ से मिले साक्ष्य के आधार पर भूमि विवाद से जुड़े मामलों का निस्तारण किया जाता है। यदि इन विवादों में हुए निर्णय के बाद भी किसी पक्ष को शिकायत है तो वह अवगत कराए। उसकी शिकायतों पर गंभीरता से विचार कर विवादों को नियमानुसार यथाशीघ्र निस्तारित किया जाएगा।
- सुमित सिंह, तहसीलदार, पडरौना
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बीते सप्ताह 49 मुकदमों में से सात का निस्तारण
पडरौना। सदर तहसील क्षेत्र के जंगल सिंगापट्टी और मोजहिदा खास गांव में सात लोगों के पट्टे की जमीन को लेकर लंबे समय से चल रहे 49 मुकदमे में से बीते सप्ताह कुल सात मामलों का निस्तारण किया गया।
इसी तरह तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के धुरिया कोट में तहसील प्रशासन ने रास्ते की जमीन पर हुए अतिक्रमण को खाली कराया। तमकुहीराज एसडीएम विकास चंद ने बताया कि बीते 10 दिनों में 1200 से अधिक मामले निस्तारित किए गए हैं। इन मामलों के कुछ फरियादियों में संतोष तो कुछ में असंतोष दिखा।