सुकरौली। शतचंडी महायज्ञ के चौथे दिन शनिवार को मंत्रोच्चार गूंजता रहा। परिक्रमा के दौरान भी श्रद्धालु जयकारे लगाते रहे। यज्ञाचार्य दामोदर दास ने कहा कि उत्तम और मध्यम पुरुषों में समान भाव रखकर सुख-दुख को भी एक समझना चाहिए। सच्चे मन में ही प्रभु वास करते हैं।
यज्ञाचार्य ने कहा कि राजा का कल्याण प्रजा पालन में ही है। इससे उसे परलोक में प्रजा के पुण्य का छठा भाग मिलता है। इसके विपरीत जो राजा प्रजा की रक्षा नहीं करता, उसका सारा पुण्य प्रजा छीन लेती है और बदले में उसे प्रजा के पाप का भागी होना पड़ता है। श्रेष्ठ ब्राह्मणों की संपत्ति और पूर्व परंपरा से प्राप्त धर्म को ही अपनाना चाहिए। अच्छे मनुष्य के गुण स्वभाव प्रभु को वश में कर लेता है। इसलिए स्वच्छ आचरण करते हुए मनुष्य जब प्रभु से जो कुछ भी मांग लेता है, उसे प्रभु तुरंत दे देते हैं। उस मनुष्य को गुरु से रहित यज्ञ तथा योग का आश्रय नहीं लेना पड़ता है। प्रभु सच्चे मनुष्य के हृदय में वास करते हैं। आचार्य दीपक ओझा ने यज्ञमान के साथ हवन किया। इस दौरान दिनेश शर्मा, अंकुश जायसवाल, गुरुदयाल, विजेंद्र मद्धेशिया, नीरज शर्मा आदि मौजूद रहे।