तमकुहीराज। क्षेत्र के कोईन्दी बरियारपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन आचार्य विवेक पाण्डेय ने कहा कि जो व्यक्ति सच्चे मनोभाव से भगवान की भक्ति करता है, भगवान उसके वश में हो जाते हैं। महाराज उत्तानपाद के पुत्र बालक ध्रुव ,माता सुरुचि के कटु वचन सुनकर 5 वर्ष की अवस्था में वन जाकर पांच माह तक कठोर तपस्या भगवान नारायण को और अपने बस में कर लिया जिससे पूरा भूमंडल तीनों लोक के सृष्टि चर अचर मे, प्राण वायु रुक गया इसके बाद भगवान नारायण बिवश हो गए, और अपने भक्त बालक ध्रुव को अपने सीने से लगा लिया और ध्रुव आलोक में स्थापित कर दिया।