जिला अस्पताल में बुजुर्ग मरीजों के लिए जिरियाट्रिक वार्ड बनकर तैयार
- पुराने लेबर रूम एवं वार्ड में बनाया गया है वार्ड
- एमसीएच विंग में संचालित हो रहा अब लेबर रूम और वार्ड
- 60 साल से ऊपर के कमजोर और चलने-फिरने में असमर्थ मरीजों का होगा इलाज
- भूतल पर होने के कारण मरीजों को आने-जाने में नहीं होगी परेशानी
पडरौना। जिला अस्पताल में बुजुर्ग मरीजों के लिए जीरियाट्रिक वार्ड बन गया है। यहां एक ही छत के नीचे भूतल पर ही बुजुर्ग मरीजों के इलाज से संबंधी हर सुविधा मिलेगी। उन्हें दवा से लेकर फिजिकल चेकअप तक के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। ऑक्सीजन सुविधा से युक्त इस वार्ड में दस मरीज भर्ती किए जा सकेंगे।
जिला अस्पताल की ओपीडी और इमरजेंसी कक्ष को मिलाकर तकरीबन डेढ़ हजार मरीज प्रतिदिन इलाज के लिए आते हैं। इनमें बुजुर्ग मरीज भी होते हैं। जिन मरीजों को भर्ती करने की जरूरत पड़ती है, उन्हें वार्ड में भर्ती कर दिया जाता है। ये बुजुर्ग मरीज भी अन्य मरीजों के साथ ही वार्ड में भर्ती किए जाते हैं, लेकिन अब शासन ने ऐसे मरीजों के इलाज के लिए अलग वार्ड बनाने का निर्देश दिया है।
जीरियाट्रिक वार्ड खासकर उन बुजुर्ग मरीजों के लिए बनाया जाता है, जो बेहद कमजोर और चलने-फिरने से असमर्थ होते हैं। उनके लिए इस जीरियाट्रिक वार्ड में ही चिकित्सा संबंधी सारी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। इस वाउऌ् में केवल बुजुर्ग मरीज ही भर्ती किए जाएंगे, जो शुगर, ब्लड प्रेशर, हाइपरटेंशन, पैरालिसिस (फालिस) सहित अन्य बीमारियों से ग्रस्त होंगे। इस वार्ड में भी मरीजों के भर्ती होने पर ठंड से बचाव के पूरे इंतजाम किए जाएंगे। शारीरिक परीक्षण के लिए जरूरी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। मरीज की स्थिति क्या है, उसे कौन से उपचार की आवश्यकता है। इसकी निगरानी की जाएगी। इसी वार्ड में मरीज को दवाएं भी उपलब्ध होंगी। इसके अलावा मरीजों की जांच और रहने-खाने की सुविधाएं मुहैया होंगी।
बुजुर्ग मरीजों के इलाज के लिए शासन ने जीरियाट्रिक वार्ड बनाने का निर्देश दिया था। उस निर्देश के क्रम में पुराने लेबर रूम एवं वार्ड को जिरियाट्रिक वार्ड के रूप में तैयार करा दिया गया है। दस बेड के इस वार्ड में बुजुर्ग मरीजों के चिकित्सा की सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। शारीरिक रूप से कमजोर, चलने फिरने में असमर्थ, शुगर, ब्लड प्रेशर, हाइपरटेंशन, पैरालिसिस सहित विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त बुजुर्ग मरीजों को भर्ती किया जाएगा। खान-पान का ध्यान भी रखा जाएगा।
डॉ. एसके वर्मा, सीएमएस, जिला अस्पताल