नरवाजोत में बांध से सटकर बहती गंडक नदी। संवाद
तमकुहीरोड। गंडक नदी का डिस्चार्ज रविवार को 75 हजार क्यूसेक के आस पास था। यह सोमवार को सुबह अचानक बढ़कर 1.24 लाख क्यूसेक पहुंच गया। जिससे एक बार फिर नदी का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ना शुरू हो गया है। जिसे लेकर बाढ़ खंड के अभियंताओं ने नरवाजोत बांध और एपी बांध की चौकसी तेज कर दी है। लोगों का कहना है कि यदि नदी के डिस्चार्ज में उतार चढ़ाव का सिलसिला इसी तरह बना रहता है तो नदी पुनः बांध की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है। सेवरही विकास खंड के पिपराघाट स्थित नरवाजोत एक्सटेंशन के पास का किमी 0.500 से किमी 1.000 के बीच का पांच सौ मीटर का हिस्सा लगभग एक माह तक गंडक नदी के कटान के जद में रहा है। यहां नदी कटान करती हुई बांध को काफी क्षतिग्रस्त कर चुकी है। कटान के चलते 30 से 40 किसानों की फसल के साथ उपजाऊ भूमि भी नदी की धारा में विलीन हो चुकी है। किसानों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ा है। एक सितंबर के बाद नदी के तेवर में नरमी आ गई। नदी बांध से दूर हो कर बहने लगी थी। नदी का डिस्चार्ज भी धीरे धीरे कम हो कर 65 हजार क्यूसेक तक पहुंच गया था, लेकिन पिछले बृहस्पतिवार को नदी का डिस्चार्ज बढ़ कर 1.02 लाख क्यूसेक तो शुक्रवार को 1.04 लाख क्यूसेक पहुंच गया। नदी के जलस्तर मेें वृद्धि होनी शुरू हो गयी थी। बाद में रविवार को नदी का डिस्चार्ज घट कर 75 हजार क्युसेक पहुंच गया था। सोमवार को सुबह अचानक नदी का डिस्चार्ज बढ़ कर 1.24 लाख पहुंच गया। एक बार फिर नदी के जलस्तर में धीरे धीरे वृद्धि होना शुरू हो गया है। इसे देखते हुए जेई रमेशधर दुबे, जेई सुनील कुमार यादव सहित अन्य अभियंताओ ने बांध पर अपनी चौकसी तेज कर दी है। लोगों का कहना कि यदि नदी के डिस्चार्ज में उतार चढ़ाव का सिलसिला इसी तरह जारी रहता है तो नदी की धारा के पुनः नदी बांध की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है। बाढ़ खंड सेवरही के एसडीओ दीपरतन सिंह ने कहा कि डिस्चार्ज में कमी आ रही है। फिलहाल बांध को कोई खतरा नहीं है।