फिरंगी गोसाई ने स्वतंत्रता आंदोलन में उखाड़ दी थी रेल की पटरी, तोड़ दिए थे टेलीफोन के तार
संवाद न्यूज एजेंसी
दुदही। जिन्होंने देश को आजादी दिलाने के लिए अपने प्राण तक न्यौछावर कर दिए, आज उनका परिवार मुफलिसी में जी रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन में रेल की पटरी उखाड़ने और टेलीफोन का तार तोड़कर अंग्रेजों का संपर्क तोड़ने वाले फिंरगी गोसाई का परिवार दो जून की रोटी जुटाने के लिए मशक्कत कर रहा है। उन्हें आवास समेत अन्य सरकारी सुविधाएं भी नहीं मिली हैं। स्थानीय प्रशासन उन्हें किसी कार्यक्रम में बुलाना भी उचित नहीं समझता है।
दुदही ब्लॉक के बांसगांव खैरवा निवासी फिरंगी गोसाई ने सन 1942 में अंग्रेजों का गेहूं बैकुंठपुर से बभनौली जाते समय खैरवा गांव के पास लूट लिया था। दुदही रेल की पटरी उजाड़ दिए और टेलीफोन तार काट कर अंग्रेजों का संपर्क तोड़ दिया था। इससे नाराज अंग्रेजों ने फिरंगी गोसाई के गांव में खूब उत्पात मचाया था।
अंग्रेजों ने उनके गांव में आग लगा दी थी। फिरंगी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। देश की आजादी में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। फिरंगी गोसाई के पुत्र सीताराम का वर्ष 2016 में निधन हो गया। फिरंगी के पौत्र राजकुमार को जब सरकारी सहायता नहीं मिली तो, वह अपना खेत बेच कर दो कमरे का घर बनवाए।
उसमें पत्नी और तीन बच्चे सुनील 14, अनिल 12, अंकिता कुमारी छह वर्ष के साथ रहते हैं। शेष बचे रुपये से एक टेंपो खरीदकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उनके परिवार को अब तक आवास, शौचालय, उज्ज्वला गैस का लाभ नहीं मिला है। उनके दरवाजे पर इंडिया मार्क का हैंडपंप तंक नहीं लगा है।
उनके गांव के 98 वर्षीय भृगराशन कहते हैं कि 1942 की लड़ाई के समय इनकी उम्र 16 वर्ष की थी। उन्होंने कि जब गेहूं लूटे और अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन किए, तो अंग्रेज बौखला गए। पहले फिरंगी का घर जलाए और फिर पूरे गांव में आग लगा दिया। फिरंगी को एक वर्ष तक जेल में रखे। चक्की से अटा पिसवाते थे।
गांव के 82 वर्षीय अलीम अंसारी ने बताया कि इस परिवार के लोग आवास और शौचालय के लिए अधिकारियों से कई बार गुहार लगाई, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिला। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सत्यनारायण गुप्ता के पुत्र भरत गुप्ता ने बताया कि सेनानियों की परिवार को उचित सम्मान नहीं मिल रहा है। सेनानियों की पत्नियों की बाकी लगी पेंशन आज तक नहीं मिल पाई है।
फिरंगी गोसाई के परिवार के लोगों को कभी किसी कार्यक्रम में बुलाया ही नहीं जाता है। व्यास प्रजापति ने कहा कि इस परिवार के लोगों को कभी भी किसी कार्यक्रम में बुलाकर सम्मान तक नहीं किया जाता है।