जिले के सभी तहसील कार्यालयों में काउंटर लगाकर लोगों से लिया जा रहा है आवेदन
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। जिले के लोगों की मेहनत के करोड़ों रुपये का भुगतान विभिन्न फाइनेंस कंपनियां दबाएं हुई हैं। गाढ़ी कमाई और डूबी पूंजी को पाने के लिए एक माह के भीतर करीब दो लाख लोगों ने रुपये की वापसी के लिए आवेदन किया है। जिले के सभी तहसील में खोले गए काउंटर पर लोगों की भीड़ जुट रही है। इसमें शहर के कई ऐसे बड़े लोग हैं जो लाखों रुपये फाइनेंस कंपनियों में जमा कर रखे हैं।
करीब दो से तीन दशक पूर्व में जिले में कई फाइनेंस कंपनियां खुलीं और एक के बाद एक बंद होती गईं। इनके बंद होने से इन कंपनियों में जमा लोगों के रुपये फंसते गए। लोग रुपये पाने के लिए भटक रहे हैं। इस समस्या के निदान के लिए जिले के सभी तहसील कार्यालय में अलग से काउंटर बनाकर जून के प्रथम सप्ताह से लोगों के आवेदन सहित अन्य कागजात जमा कराए जा रहे हैं।
पडरौना तहसील के कर्मचारियों की मानें तो अब तक क्षेत्र के 80 हजार से अधिक लोगों ने आवेदन जमा किया है। तमकुहीराज तहसील में 25 हजार, कसया तहसील में दस हजार, हाटा तहसील में 50 हजार, खड्डा तहसील में 20 हजार और कप्तानगंज तहसील में 25 समेत दो लाख से अधिक लोगों के आवेदन जमा हो चुके हैं।
इन आवेदनों को संस्थागत वित्त, बीमा एंव वाह्य सहायतित परियोजना महानिदेशालय उत्तर प्रदेश के वेबसाइट पर अपलोड किया जा रहा है। शुक्रवार को पडरौना तहसील मेें बीस लोगों ने आवेदन चार लाख से अधिक रुपये वापसी के लिए आवेदन किया है। अब देखना है कि इन लोगों के रुपये कब वापस होते हैं। यह जानकारी आवेदकों को भी नहीं दी जा रही है। इसके कारण केवल फार्म जमा कर लोग वापस चले जा रहे है।
कागजों की गठरी में लिपटे हैं लोगों के अरमान, किसी के बेटी की है शादी तो किसी को बनवाना है मकान
फोटो है।
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। जिले के तहसील कार्यालयों में मालखाने अथवा अन्य कमरों में नजर कागज की गठरी नजर आएगी। वहां लाइन में खड़े आवेदक पहले आवेदन जमा करने के लिए होड़ में लगे रहते हैं। यदि किसी ने आवेदन जमा करने में जल्दबाजी दिखाई तो उन्हें लाइन में खड़े लोगों के साथ कर्मचारियों की भी डांट-फटकार सुनाने को मिल रही है।
इतना नहीं तहसील परिसर में सड़क किनारे बाइक अथवा पेड़ के नीचे फार्म भी भरते लोग नजर आएंगे। आखिर इतनी संख्या में किसके लिए आवेदन करने को भीड़ जुटी हुई और फार्मों के कमरे में ढेर लगे हैं। जबकि सच यह है कि यह कागज की गठरी नहीं इसमें कई लोगों के अरमान छिपे हैं।
करीब दो दशक पहले जिले में सहारा, विश्वामित्र, पर्ल, एग्रोटेक, वसुंधरा सहित कई फाइनेंस कंपनियों ने लुभावने वादा कर लोगों से निवेश कराया। न्यूनतम समय राष्ट्रीकृत बैंकों से अधिक धन देने की स्कीम का लाभ पाने के लिए लोगों ने अपनी गाढ़ी कमाई जमाकर दी, लेकिन अब फंस चुके हैं।
पडरौना तहसील में आवेदन जाम करने पहुंचे तपेसर कुशवाहा और रामधनी प्रसाद ने बताया कि लड़की की शादी के लिए रुपये जमा किए थे, लेकिन रुपये डूब गए और कर्ज लेना पड़ेगा। सुखपुरा गांव के रामेश्वर यादव, शिवपुर के नितेन विश्वकर्मा, राजेश जायसवाल ने बताया कि दुकान से हुई लाभ में से कुछ रुपये प्रतिदिन जमा किए थे। सोचा था कि एकमुश्त रुपये मिलने पर कोई नया कार्य हो जाएगा। लेकिन कंपनियों के सभी वादे छलावा निकले। अब पछताना पड़ रहा है।
- गाढ़ी कमाई से एकत्र रुपये को अधिक मुनाफे की चक्कर में सहारा और जीसीए कंपनी में डेढ़ लाख रुपये जमा किया था। कंपनियों के लोगों ने पांच वर्ष बाद दो गुना से अधिक मिलेगा। सोचा था कि एकमुश्त रुपये मिलने पर कोई बड़ा आसानी से कर लूंगा। लेकिन सभी अरमान टूट गए।
-विनय कुमार, मठिया
सहारा बैंक में चार लाख रुपये जमा किया था। सोचा था कि रुपये मिलने पर मकान बनवाने में सहूलियत हो जाएगी, लेकिन रुपये भी फंस गए और जमा पूंजी भी चली गई। फार्म तो जमा कर दिया, लेकिन पैसा कब मिलेगा, इसका पता नहीं है।
मौनुद्दीन अंसारी, कप्तानगंज
पल्स में 95 हजार और सहारा बैंक में करीब तीन लाख रुपये जमा किए थे। आवेदन जमा होने की जानकारी हुई तो रुपये की वापसी का उम्मीद जगी है।
- विक्की पटेल, तमकुहीराज
सहारा बैंक में वर्ष 2010 में 50 हजार रुपये जमा किए थे। सोचा था कि एकमुश्त रुपये मिलने पर बड़े खर्च होने पर मदद मिलेगी। लेकिन अब तो रुपये वापसी का इंतजार है।
संतोष शर्मा, सिंहपुर हाटा
कोट
तहसील में प्राप्त सभी आवेदनों को एडीएम कार्यालय में भेजा जाएगा। इसके बाद वहां से ऑनलाइन कर सभी पत्रावलियां शासन को भेज दी जाएंगी।
-सुमित सिंह, तहसीलदार, सदर
जिले के तहसीलों में लोगों के आवेदन जमा कराए जा रहे हैं। इसके बाद उसे ऑनलाइन किया जा रहा है। शासन प्रयास कर रहा है कि लोगों के रुपये जल्द से जल्द वापस हो जाएं।
-वैभव मिश्र, एडीएम, कुशीनगर