संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। कुशीनगर हाईवे के रास्ते पशु तस्कर छोटे से बड़े वाहन में पशुओं को लादकर ले जाते हैं। इन पशुओं को वध के लिए बिहार और बांग्लादेश पहुंचाते हैं। जहां इनका मांस बिकता है तो तस्कर कम दिनों लाखों रुपये कमाते हैं। कंटेनर का 20 लाख से अधिक मिल जाता है।
एसपी धवल जायसवाल ने बताया कि पकड़े गए पशु तस्कर बताते हैं कि उनको गोरखपुर से सिर्फ 100 किलोमीटर की दूरी पार कर बिहार प्रवेश कराने तक पिकअप वाहन को 40 से 45 हजार रुपये मिलते हैं। इसमें चालक को अलग से पांच से आठ हजार रुपये मिल जाते हैं। छुट्टा पशुओं को भी वे रास्ते में वाहन में लाद लेते हैं।
गोरखपुर के छपिया में हर मंगलवार को लगता है पशु मेला
पशु तस्कर बताते हैं कि गोरखपुर के छपिया में हर मंगलवार को पशु बाजार लगता है। इसके लिए सोमवार की रात से दुधारू पशुओं को लेकर पशुपालक पहुंच जाते हैं। इसी के आड़ में कुछ लोग बहुत ही कम दामों बगैर बछड़े वाले पशुओं को बेच देते हैं।
चोरी के वाहन का करते प्रयोग, हरियाणा से ले जाते है बिहार
पशु तस्कर चोरी की वाहन का ही प्रयोग करते हैं। ताकि पुलिस के साथ कोई वारदात हो जाने पर वह वाहन छोड़कर भाग जाए तो पुलिस उन तक नहीं पहुंच सके। चोरी की गाड़ी का चेसिस नंबर तक बदल डालते हैं। नंबर प्लेट भी बदल कर वाहन चलाते हैं। वहीं, बड़े कंटेनर या बड़ी गाड़ी में शामली, मुरादाबाद, हरियाणा से पशु लादकर बिहार पहुंचाते हैं। इसके लिए उनको एक खेप का 20 लाख से अधिक मिलता है। पुलिस सूत्र बताते हैं कि पशु तस्करों को पकड़ने में पुलिस वाले भी डरते हैं। पशु तस्कर पुलिस पर जानलेवा हमला करके आगे बढ़ जाते हैं। उनको इसके लिए भी पैसे मिले रहते हैं। पशु तस्कर जहां से निकलने बीच में कहीं वाहन नहीं रोकते हैं। वह खाने-पीने का सामान व पेशाब के लिए बोतल पास में रखते हैं।