विरवट कोन्हवलिया में बांध से सटकर बहती नदी। संवाद
तमकुहीरोड। बाढ़ से बचाव के लिए चल रहे काम अभी अधूरे हैं। इस बीच बारिश के चलते नदियों के जलस्तर में हो रहे उतार चढ़ाव से तटवर्ती गांव वालों को बाढ़ का भय सता रहा है। इधर तीन दिनों में हुई बारिश के चलते एपी, नरवाजोत, अमवाखास और छितौनी बंधे पर करीब एक हजार से अधिक रेनकट बन गए हैं, जिसको भरने का कार्य अभी तक शुरू नहीं हो सका है। अगर नदी में अचानक पानी बढ़ा तो तबाही मच सकती है। वहीं पिछले चार दिनों में गंडक का डिस्चार्ज 1.47 लाख क्यूसेक से घटकर अब 80 हजार क्यूसेक से नीचे आ गया है। इससे विरवट कोन्हवलिया सहित तटबंधों के अन्य हिस्सों से पानी उतरने लगा है, लेकिन खतरा अभी भी बरकरार है, क्योंकि अनेक स्थानों पर नदी के बंधे और ठोकर से सटकर बह रही है। डिस्चार्ज बढ़ने के चलते खतरा बढ़ सकता है। तमकुहीराज तहसील क्षेत्र में नरवाजोत से अहिरौलीदान तक लगभग साढ़े सत्रह किलोमीटर की लंबाई में गंडक नदी बहती है। जहां बरसात के चार महीने बांध की सुरक्षा के साथ बांध के किनारे बसे बीस हजार से अधिक लोगों पर काफी भारी साबित होता है। यहां वाल्मीकिनगर बैराज से गंडक नदी में लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने का खतरा बना रहता है, विगत सालों में गंडक नदी में भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण नदी के रौद्र रूप से जहां घनी आबादी वाले कई गांव कटान की भेंट चढ़ चुके हैं। इस साल बाढ़ खंड के प्रस्ताव पर शासन ने तटबंधों की सुरक्षा के लिए 72 करोड़ की सात परियोजनाओं की मंजूरी दी थी। जिसके सापेक्ष अधिकांश जगहों पर तीन चौथाई से अधिक कार्य पूरा करा लिए गए है और शेष कार्यों को भी पूरा कराने में बाढ़ खंड के जेई रमेशधर दुबे आदि पूरी मुश्तैदी से लगे हुए है। बंधे के किनारे रहने वाले मथुरा सिंह, भरत साह, दीनानाथ सिंह, सहदेव चौहान, रामायन राय आदि का कहना है कि बांध की सुरक्षा के लिए जुलाई की तरह अगस्त का महीना भी काफी संवेदनशील होता है।