धान व मक्के की फसल में कीटों के प्रकोप से किसान चिंतित
पडरौना। कम बारिश होने से मक्का व धान की फसलों पर फाल आर्मी कीटों का हमला तेज हो गया है। पर्याप्त बारिश न होने से परेशान किसानों की मुश्किलें इन कीटों ने और बढ़ा दी हैं।
मौसम के बदले रुख से किसानों को लगातार झटका लग रहा है। मानसून आने पर किसानों को बारिश की उम्मीद थी। जून, जुलाई ही नहीं, अगस्त में भी पर्याप्त बारिश नहीं हुई। इससे खरीफ की फसलों की बुवाई अधिकांश किसान नहीं कर पाए। धान की रोपाई भी निजी साधनों के सहारे की गई। फसलें पानी के अभाव में मुरझा रही हैं। इससे किसान पंपिंगसेट से सिंचाई कर फसलों को बचाने में लगे हैं। वहीं फसलों को पर्याप्त पानी न मिलने से उनमें कीट लगने लगे हैं। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। पपिंगसेट से सिंचाई करने से खेती की लागत में वृद्धि हुई ही है, अब कीटनाशक पर होने वाले खर्च से किसानों की दिक्कत और बढ़ गई है।
मक्का की वृद्धि रुकी
बारिश कम होने से इस बार जिले में मक्का की फसल की वृद्धि नहीं हो पा रही है। वहीं तीन-चार बार कीटनाशक का छिड़काव करने के बाद भी कीट लग रहे हैं। इससे किसान परेशान हैं। बारिश न हुई तो किसानों को मक्का की फसल पर संकट नजर आ रहा है। वहीं, पौधा न बढ़ने से पशुओं के चारों को भी समस्या होना तय है।
फसल बचाने के लिए कर सकते हैं ये उपाय
उप कृषि निदेशक आशीष कुमार ने बताया कि मक्का की फसल में फाल आर्मी कीट का प्रकोप दिखाई दे रहा है। यह मक्का के लिए काफी खतरनाक है। यह कीट धान, ज्वार, बाजरा व गन्ने की फसल को भी नुकसान पहुंचाता है।
बचाव के लिए किसान एक एकड़ खेत में छह से आठ बाई के आकार में 6-8 फीट लंबी लकड़ी की टहनियां, पक्षियों के बैठने के लिए लगाएं। शाम सात से आठ बजे तक तीन चार जगह रोशनी व्यवस्था करने के साथ पांच मिली लीटर नीम ऑयल प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। कीट का प्रकोप अधिक होने पर रसायनिक उपचार करें। इसके लिए इमामेक्टिन बेनजोइट 0.4 ग्राम प्रति लीटर पानी में स्पीनेटोररम 11.7 प्रतिशत 0.5 मिली या क्लोरेंट्रनिलिप्रोल 18.5 प्रतिशत 0.4 मिली या थायोमेथाक्साम 12.6 प्रतिशत व लैंबडासाइहैलोथ्रिन 9.5 प्रतिशत 0.25 मिली प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर फसल में छिड़काव करें।