पकड़ियार बाजार। क्षेत्र के मड़ार विंदवलिया गांव के किसानों ने पारंपरिक खेती से हटकर व्यवसायिक खेती को अपनाना शुरू कर दिया है। यहां के किसान गन्ने की जगह केले को नकदी फसल के रूप में उगा रहे हैं। उसके साथ सहफसली खेती कर अच्छी आमदनी कर रहे हैं। मड़ार विंदवलिया के किसान सुग्रीव कुशवाहा, तैयब अली, मनोज राय आदि ने बड़े पैमाने पर केले की खेती की है। इन किसानों ने केले के नए पौधों की कतारों के बीच आलू, बैंगन और अन्य हरी सब्जियों की खेती भी की है। इससे खेत का बेहतर उपयोग हो रहा है और एक ही समय में कई फसलों से आय मिल रही है। उनका कहना है कि केले की फसल तैयार होने में करीब एक साल का समय लगता है। इस दौरान सहफसल के रूप में लगाई गई सब्जियों और आलू की एक फसल कट जाती है। इससे खेती की शुरुआती लागत निकल जाती है।
केले की फसल में खाद, सिंचाई व देखभाल पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ता। उन्होंने बताया कि केला कच्ची फसल होने के चलते आर्थिक जोखिम अधिक रहता है।