कुशीनगर में विश्व बैंक सहायतित प्रो-पुअर पर्यटन विकास परियोजनाओं की हकीकत
16.83 करोड़ की लागत से हो रहा निर्माण कार्य
20 दिसंबर 2022 तक पूरा करने की थी समयावधि
चार अगस्त 2021 को काम हुआ था आरंभ
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। कुशीनगर के पर्यटन केंद्रों को संवारने और उनकी रौनक बढ़ाने के लिए कार्यदायी संस्था गोरखपुर विकास प्राधिकरण ने लगभग दो साल में भी पूरा नहीं किया है। कार्यदायी संस्थान ने चार अगस्त 2021 को निर्माण कार्य शुरू किया था। 16 करोड़ 83 लाख रुपये की लागत से कुशीनगर में पथिक निवास का उच्चीकरण, विपश्यना केंद्र का सुंदरीकरण, पाथवे, पवेलियन, तालाब का सुंदरीकरण, मेडिटेशन स्थल, हिरण्यावती नदी पर फुट ओवरब्रिज, फूड प्लाजा का नवीनीकरण, हस्त-शिल्पकारों के लिए छह दुकानें, लाइट सहित अन्य कार्य होना था। इसे 30 दिसंबर 2022 तक पूर्ण कर लेना था, लेकिन अब तक काम पूरा नहीं हो सका है।
कुशीनगर में पर्यटन विकास को बढ़ावा देने के लिए विश्व बैंक सहायतित प्रो-पुअर पर्यटन विकास परियोजनाओं की कार्यदायी संस्था गोरखपुर विकास प्राधिकरण ने चार अगस्त 2021 को निर्माण कार्य शुरू किया था, लेकिन मियाद बीते छह माह हो चुके हैं। पर्यटन से जुड़े विकास कार्य पूरे नहीं हो सके हैं।
गोरखपुर विकास प्राधिकरण के जिम्मेदार अब दावा कर रहे हैं कि परियोजना से जुड़े अधूरे कार्यों को अगले दो महीने यानी सितंबर तक पूरा कर लिया जाएगा, लेकिन करीब दो साल में जब कार्य पूरा नहीं हो सका तो दो माह में कैसे पूरा होगा, यह दावे पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है।
कोट-
एएसआई से अनुमति देर से मिलने व विश्व बैंक से मिले कुछ सुझावों पर परिवर्तन के चलते समय से काम पूरा नहीं हो पाया। सितंबर तक अवधि बढ़ी है। हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा। अधिकांश कार्य अंतिम चरण में हैं। उन्हें जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
-किशन सिंह, अधिशासी अभियंता, गोरखपुर विकास प्राधिकरण
राही कुटीर पर्यटक आवास गृह व पर्यटन कार्यालय, बुद्ध विपश्यना केंद्र, फुट ओवरब्रिज निर्माण व फूड प्लाजा के अधूरे कार्यों को जल्द पूरा कर लिया जाएगा। कुछ लगभग पूरे हो चुके हैं। देर होने की वजह एएसआई से अनुमति मिलने में देरी, विश्व बैंक टीम लीडर स्टेफिनिया का सुझाव व परिवर्तन है। लगातार अद्यतन स्थिति का जायजा लिया जा रहा है।
-प्राण रंजन, पर्यटन सूचना अधिकारी, कुशीनगर
एएसआई की अनुमति रही पेच
पर्यटन और गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) के जिम्मेदारों के मुताबिक, बुद्ध विपश्यना केंद्र के सुंदरीकरण कार्य में देर होने की प्रमुख वजह एएसआई की अनुमति का न मिलना था। अनुमति के लिए आवश्यक कार्रवाई करने और अनुमति मिलने के बाद कार्य प्रारंभ होने में लगभग एक साल लगा। चूंकि बुद्ध विपश्यना केंद्र का सुंदरीकरण के अलावा पाथवे, तीन पवेलियन, प्रसाधन केंद्र, दो तालाबों का सुंदरीकरण व पाथवे, मेडिटेशन स्थल पर प्रकाश समेत अन्य कार्य शामिल था। वर्तमान में 85 फीसदी कार्य पूरा हो चुका है। अधूरे कार्यों को पूरा कर रहे हैं। जैसे पाथवे के किनारे सीमेंटेड ब्रिक्स, पेंटिंग, घास लगाने, लाइट आदि होना शामिल है।
राही कुटीर व पर्यटन का 99 फीसदी काम पूरा
परियोजना में राही कुटीर पर्यटक आवास गृह व पर्यटन कार्यालय का उच्चीकरण कार्य 99 फीसदी हो चुका है। मामूली कार्य जैसे खिड़कियों की रंगाई सहित हल्के कार्य नहीं हुए हैं। राही कुटीर में 28 कमरों का उच्चीकरण व इंटीरियर का काम, लाॅबी व रिसेप्शन काउंटर सहित अन्य कार्य लगभग पूरे हो चुके हैं।
फूड प्लाजा में काम परिवर्तन से देर
पर्यटन विभाग के मुताबिक, फूड प्लाजा उच्चीकरण में विश्व बैंक सहायतित प्रो-पुअर पर्यटन विकास परियोजना के अधिकारियों के सुझाव पर कार्य में परिवर्तन से देर हुई है। पहले सिर्फ फूड प्लाजा बनाने का ही खाका खींचा किया गया था। विश्व बैंक टीम ने दौरा कर स्थानीय हस्त-शिल्पकारों के लिए छह दुकानें तैयार करने के निर्णय से कार्य में परिवर्तन हुआ। दुकानों का निर्माण, फर्श सहित अन्य कार्य लगभग पूरा हो चुका है। शेष बचे को पूरा कर रहे हैं।
फुट ओवरब्रिज का निर्माण पूरा, पाथवे, पथ प्रकाश व बेंच लगाने का अधूरा
हिरण्यावती नदी पर फुट ओवरब्रिज का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है, लेकिन इस फुट ओवरब्रिज के दोनों तरफ नदी के किनारे परिक्रमा पथ बनाया जाना अधूरा है। पर्यटन विभाग के मुताबिक इसकी वजह कसाडा है। जिसने पहले इसे तैयार करने की बात कही थी। फिर मुकर गया। अब यह भी कार्य पर्यटन व प्राधिकरण मिलकर पूरा करेंगे। इसके बनने से हिरण्यावती नदी की बुद्धा घाट से परिक्रमा की जा सकेगी।
मानव संसाधन बढ़ाकर तीव्रता बढ़ाने के निर्देश
30 नवंबर 2022 को भी डीएम रमेश रंजन ने दौरा किया था। गुणवत्तापूर्ण कार्य करने के निर्देश दिए थे। बीते तीन दिसंबर 2022 को डीएम रमेश रंजन ने पर्यटन विकास परियोजनाओं की समीक्षा में मानव संसाधन बढ़ाकर काम में तीव्रता लाने के निर्देश दिए थे। समीक्षा बैठक में सीडीओ गुंजन द्विवेदी, तत्कालीन एडीएम उपमा पांडेय, तत्कालीन क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी रविंद्र कुमार रहे। एसडीएम कल्पना जायसवाल भी दौरा कर निरीक्षण में सुस्त रफ्तार पर फटकार लगाई थीं।
विश्व बैंक टीम ने दिए थे तेजी लाने के निर्देश
22 जनवरी को विश्व बैंक की टीम में टाॅस्क टीम लीडर स्टेफानिया, स्टेट प्रोजेक्ट कोऑडिनेशन कमेटी के चेयरमैन ओपी श्रीवास्तव, एक्सपर्ट रचना सरकार, लाल बहादुर दुबे की मौजूदगी में कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए थे। इस दौरान जीडीए के अधिशासी अभियंता किशन सिंह, सहायक अभियंता राज बहादुर सिंह, पर्यटन सूचना अधिकारी प्राण रंजन, इंजीनियर सीपी श्रीवास्तव, उत्पल, रमेश रंजन, नवल किशोर शर्मा, मोली जार्ज आदि मौजूद थे।
यह है पुरातत्व का नियम
कुशीनगर में मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर और माथा कुंवर मंदिर है, जिसे पुरातत्व विभाग ने मोनूमेंट (केंद्रीय संरक्षित स्मारक) घोषित किया है। ऐसे में इसकी परिधि के 300 मीटर में किसी भी प्रकार का निर्माण, पुनर्निर्माण व खनन बिना एनओसी के पूरी तरह से अवैध है। बगैर अनुमति चल रहा था कार्य। जबकि होटल पथिक निवास 100 मीटर और शेष हिस्सा 300 मीटर के दायरे में है। ऐसे में बिना एनओसी मरम्मत कार्य अवैध ठहराते हुए नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा गया था। इस नियम में बुद्ध विपश्यना केंद्र भी शामिल रहा।