कसया। देश में पूरी तरह से पूंजीवादी व्यवस्था काम कर रही है। पूंजीपतियों के हाथ में धन केंद्रित हो रहा है। ऐसे में भारतीय लोकतंत्र को बचाने के लिए देश की अर्थ नीति बदलनी होगी।
ये बातें किसान एकता समिति के अध्यक्ष शिवाजी राय ने कही। वे रविवार को सिसवा महंथ चौराहे पर किसानों से चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार में पैसा किसानों और मजदूर के पास नहीं जा सकता है। यह घोर चरम वाद है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक सबसे अधिक आत्म हत्या मजदूर व किसान कर रहे हैं। भारत मे औपनिवेशिक काल के बाद भारत के लिए जिस इकोनाॅमी की बात की गई और उसे लागू की गई। उसमें भारी उद्योग, मझोले, छोटे उद्योग और अति लघु उद्योगों को निरंतर संरक्षण देकर किसी भी हस्तक्षेप से रोका गया। देश के सभी विद्वान अर्थ शास्त्री लगातार कह रहे हैं कि यह इकोनॉमी पालिसी देश के लिए हानिकारक है। ऐसी हालत में भारतीय लोकतंत्र को बचाने के साथ आम आदमी के हक में पूंजी को लेने के लिए बढ़ी पूंजी पर अंकुश लगाना होगा और अर्थ नीति बदलनी होग। इस दौरान क्षेत्र के कई किसान मौजूद रहे।