-पिछले वर्ष 40 लाख लगाए गए पौधों का पता नहीं
-पांच वर्षों में वन क्षेत्र का विस्तार नहीं, सिर्फ आंकड़े की बाजीगरी
-कौन पूछे पुराने पौधों को, नए लक्ष्य को साधने की तैयारी में जिम्मेदार
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। जिले में रोपे गए 40 लाख पौधे सूख गए, लेकिन साहबों की फाइलों में हरियाली बिखेर रहे हैं। हालांकि, वन विभाग के जिम्मेदार 30 फीसदी पौधों के सूखने का दावा कर रहे हैं और नए साल के लक्ष्य को पूरा करने में जुट गए हैं। इसी कागजी आंकड़ेबाजी की वजह से वास्तविक रूप से जिले में वन क्षे़त्र का विस्तार नहीं हो पा रहा है।
पांच वर्षों में जितने पौधे रोपे गए, उतने पेड़ कट गए। 2,904 वर्ग किमी वाले जिले में मात्र 1.1 फीसदी वन क्षेत्र है। करोड़ों रुपये खर्च कर अभियान चलाकर लगाए जा रहे पौधों को तमाम प्रयासों के बाद भी जिम्मेदार बचा नहीं पा रहे हैं। वर्ष 2017 से प्रदेश में अभियान चलाकर पौधे लगाए जाते हैं। वन विभाग के अलावा जिले के 26 अन्य विभागों को इसकी जिम्मेदारी मिलती है। पिछले वर्ष 40,39,010 पौधे रोपे गए। इसमें 27,01,016 पौधे 26 विभागों और 13,37,974 वन विभाग ने लगवाए थे।
कसया से पडरौना जाने वाली सड़क के किनारे करीब बीस किमी तक एक भी छोटे पौधे नहीं दिख रहे हैं। यही हाल रामकोला रोड, फाजिलनगर से तमकुहीरोड, खड्डा से पनियहवा की तरफ जाने वाली सड़क के किनारे की है। वन विभाग इन सड़कों के किनारे लगाए गए पौधों का संरक्षण कागजों में कर रहा है। करीब 150 माली देखरेख कर रहे हैं।
वन क्षेत्र में बढ़ोत्तरी नहीं होने के सवाल पर जिम्मेदारों का कहना है कि वृक्षों की कटाई भी होती है। इसलिए वन क्षेत्र का विस्तार नहीं हो पा रहा है। इस वर्ष 36,22,360 पौधे रोपने का लक्ष्य मिला है, जिसमें 27,03,860 पौधे 26 विभागों के अफसर और 9,18,500 वन विभाग रोपेगा। जुलाई माह में यह अभियान शुरू किया जाएगा।
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पांच साल में लग गए पौने दो करोड़ पौधे
वर्ष 2017-18 में 7,01,000
वर्ष 2018-19 मेें 8,88,000
वर्ष 2019-20 में 17,47,000
वर्ष 2020-21 में 35 लाख,
2021-22 में 40,48,865 पौधे रोपे गए।
इस तरह 1,08,84,865 पौधे अब तक जिले में लगाए जा चुके हैं।
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नर्सरियों में तैयार पौधे मुरझाए
पौधरोपण के लिए नए वर्ष का जो आंकड़ा आया है, उसे इस वर्ष वन विभाग कैसे पूरा करेगा। क्योंकि तेज धूप और लू के बीच नर्सरियों में तैयार किए जा रहे पौधे सूखने लगे हैं। अगर बारिश नहीं हुई तो अभियान देर से शुरू होगा।
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कोट
प्रदेश में पौधे लगाने का अभियान चलाया जाता है। वन विभाग के अलावा सभी विभागों को लक्ष्य दिया जाता है। पौधरोपण और उनकी देखरेख की जिम्मेदारी उसी विभाग के अफसर की होती है। सभी जिम्मेदारी वन विभाग की नहीं है। पौधे लगने के बाद करीब 30 फीसदी सूख जाते हैं। इसी अनुमान पर अगले वर्ष पुनः उस स्थान पर पौधे लगाएं जाते हैं।
-एके श्रीवास्तव, डीएफओ
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कोट
वन क्षे़त्र का विस्तार नहीं होना चिंताजनक है। सरकार की पहल के अलावा आम लोगों को पौधा लगाना चाहिए। वृक्षों की कटान पर अंकुश लगना चाहिए। वर्तमान दिनों के तापमान से बचाव के लिए एसी, कूलर या पंखा स्थायी समाधान नहीं हैं। सिर्फ तस्वीरों में पौधा न लगाएं। पौधे की देखभाल भी करें, ताकि पृथ्वी को ग्लोबल वार्मिंग, ओजोन क्षरण जैसी आपदाओं से बचाया जा सके।
-डॉ. रजनीश राय, पर्यावरणविद्