समय से अस्पताल नहीं पहुंचे डॉक्टर, मरीज परेशान
तीन से अधिक होती है होती है कसया सीएचसी में ओपीडी
संवाद न्यूज एजेंसी
कसया। नगर स्थित सीएचसी में शनिवार को डॉक्टर समय से नहीं पहुंचे। इससे इलाज कराने पहुंचे मरीजों को डॉक्टर के इंतजार में परेशान होना पड़ा। परेशान मरीज और उनके तीमारदार डॉक्टर के कक्ष की तरफ टकटकी लगाए रहे, लेकिन काफी देर तक ओपीडी में डॉक्टर की कुर्सी खाली रही। हालांकि डॉक्टर ने इस संबंध में पूछने पर खुद को अस्पताल परिसर में होने की बात कही।
शनिवार की सुबह अमर उजाला की टीम ने कसया सीएचसी की पड़ताल की। उस समय डॉक्टरों के इंतजार में मरीज परेशान दिखे। कई डॉक्टरों की कुर्सी खाली मिली। कसया सीएचसी में कुल आठ डॉक्टर तैनात हैं। अस्पताल में प्रतिदिन 300 से अधिक लोग दवा कराने आते हैं। सुबह 10:30 बजे सीएचसी की इमरजेंसी में ड्यूटी पर तैनात डॉ. जलज गुप्ता मरीज देखते मिले। वहीं ओपीडी में 10.36 पर डॉ. अशुतोष पांडेय मरीज देख रहे थे। उन्होंने बताया कि 25 मरीज देख चुका हूं। डॉ. यूसुफ भी अपने चैंबर में मरीज देख रहे थे। 10.37 पर डॉ. निधि प्रदा मल्ल और डॉ. अनामिका, डॉ. नेहा कुमारी का कक्ष खाली था। मरीज उनका इंतजार कर रहे थे। पूछने पर महिला डॉक्टरों ने खुद को ओटी और परिसर में ही होने की बात कही। 10.47 पर डॉ. नेहा अपने कक्ष में मरीज देखने पहुंचीं। पूछने पर बताया कि परिसर में ही थी। डॉ. निधि प्रदा मल्ल के इंतजार में कई मरीज बैठे थे। उसमें अंतिमा देवी ने बताया कि करीब एक घंटे से डॉक्टर का इंतजार कर रहे हैं। पर्ची लग गई है, यहां के कर्मचारी कह रहे हैं कि डॉक्टर साहब अभी आएंगी। 10.58 पर सीएचसी अधीक्षक डॉ. मार्कंडेय चतुर्वेदी अपने चेंबर में मिले थे। अस्पताल के पर्ची काउंटर पर 11.20 तक 130 मरीजों की पर्ची बनी थी।
अभी काउंटर पर पर्ची के लिए भीड़ लगी थी। अस्पताल के एक्सरे रूम में 11.23 पर टेक्नीशियन रामबेलास सिंह मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि अभी तक पांच लोगों का एक्सरे कर चुका हूं।
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सीएचसी में डॉक्टर को दिखाने आया था। डॉक्टर ने एक्सरे कराने के लिए कहा है। एक्सरे तो अस्पताल में ही हो गया है, लेकिन डॉक्टर की लिखी दवाएं पांच दिनों की न मिलकर तीन दिन की ही मिली है।
-प्रभुनाथ तिवारी, निवासी कनखोरिया
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पत्नी का इलाज कराने आया हूं। काफी देर इंतजार करने के बाद महिला डॉक्टर आई हैं। दवा लिखी है, सभी दवा बाहर से लेनी पड़ी है। जब भी दिखाने आता हूं तो हमेशा अल्ट्रासाउंड, जांच व दवाइयां बाहर की ही लिखी जाती हैं।
-ईश्वर प्रसाद, निवासी पांडेय कॉलोनी
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अस्पताल में दांत का इलाज कराने आया हूं। डॉक्टर ने देखा है और दवा लिखी है। कुछ दवा अंदर मिली है और कुछ बाहर से लेनी पड़ी है।
-मुकेश कुशवाहा, निवासी बिहार।
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सीएचसी में अल्ट्रासाउंड जांच नहीं होने से बाजार में कराना पड़ता है। वहां महंगे दाम पर जांच की जाती है। सरकारी समझकर लोग यहां आते हैं। -डब्लू यादव, निवासी बुद्ध नगरी
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ड्यूटी पर लेट से आने वाले स्टाप की हाजिरी नहीं ली गई है। तीन स्टाप अनुपस्थित है। उन्हें कड़ी चेतावनी दी गई है। जिन महिला डॉक्टरों की कुर्सी खाली है, उन्होंने बताया कि ओटी और लेबर रूम में हैं। सीएचसी में अल्ट्रासाउंड के लिए कई बार लिखकर ऊपर भेजा गया है। इसके विकल्प के रूप में माह में चार दिन मुफ्त में अल्ट्रासाउंड कराया जाता है।
-डॉ. मार्कंडेय चतुर्वेदी, सीएचसी प्रभारी, कसया।