तमकुहीरोड। वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से बड़ी गंडक नदी में सोमवार की सुबह डेढ़ लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया। इससे एपी तटबंध पर कटान का खतरा बढ़ गया है। नरवाजोत और एपी बांध पर गंडक का दबाव काफी तेज है। ठोकरों पर कटान का खतरा बढ़ता देख विभागीय अभियंता बचाव कार्य में जुट गए हैं। लोगों का कहना है कि गंडक के जलस्तर में उतार-चढ़ाव आगे भी बना रहेगा। ऐसे में संवेदनशील बिंदुओं पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने होंगे।
अगस्त का आधा महीना बीत जाने के बाद भी गंडक नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोमवार को नदी में पानी डिस्चार्ज किए जाने के बाद नरवाजोत बांध से लगायत एपी तटबंध अहिरौलीदान तक के अधिकांश ठोकरों व तटबंधों पर एक बार फिर दबाव बढ़ गया है। इससे कटान का खतरा मंडराने लगा है। सबसे ज्यादा खतरा नरवाजोत में किमी 1.700 पर और विरवट कोन्हवलिया में ठोकर नंबर चार (कट एंड वन से कट एंड टू बांध) को हो सकता है। क्योंकि इस साल नदी इन दोनों क्षेत्रों में काफी तबाही मचा चुकी है। नरवाजोत में ठोकर के नोज को नदी नुकसान पहुंचा चुकी है तो विरवट कोन्हवलिया में सैकड़ों एकड़ जमीन को अपनी आगोश में ले चुकी है। लोगों का कहना है कि अभी इस तरह का खतरा आगे भी बने रहने की संभावना है। ऐसे में सभी संवेदनशील जगहों पर सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम किया जाना जरूरी है। बाढ़ खंड सेवरही के एसडीओ रमेश यादव ने बताया कि विभाग किसी भी खतरे को लेकर चौकन्ना है और बांध की निगरानी की जा रही है।