खन्वार मंदिर में पूजन करते श्रद्धालु।
पडरौना। चैत्र नवरात्र के तीसरे दिन बृहस्पतिवार को श्रद्धालुओं ने घर और मंदिर में मां चंद्रघंटा की पूजा की। इस दिन जिले के सभी शक्तिपीठों पर श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रही। मंदिरों में हो रहे पूजन-अर्चन व शंखनाद से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
नगर के खिरकिया मंदिर, गोशाला से सटे बुढ़िया माई मंदिर, मां कोट देवी स्थान, रामकोला के धर्मसमधा स्थान, कुबेरस्थान क्षेत्र के खन्वार मंदिर में बृहस्पतिवार की सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। मां चंद्रघंटा के पूजन-अर्चन के लिए कतारबद्ध श्रद्धालुओं ने एक-एक कर मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर पूजन किया। श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो इसे लेकर मंदिरों में प्रकाश व सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। शक्ति पीठ खन्हवार देवी मंदिर में तीसरे दिन भी श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। श्रद्धा, समर्पण और विश्वास के साथ श्रद्धालुओं ने पुष्प, लवंग, अक्षत, कपूर, नारियल, पान, सोपारी तथा मिष्ठान चढ़ा पूजन-अर्चन किया और मन्नते मांगीं। नवरात्र के चौथे दिन शुक्रवार को कुष्मांडा माता की पूजा होगी। मान्यता है कि जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब इन्हीं देवी ने ब्राह्मांड की रचना की थी। इनका निवास सूर्यमंडल के भीतर के लोक में है। वहां निवास करने की क्षमता और शक्ति केवल इन्हीं में है। इनकी प्रभा सूर्य के समान है। मां की आठ भुजाएं हैं। ये अष्टभुजा देवी के नाम से भी विख्यात हैं। इनके सात हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा है। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जपमाला है। इनका वाहन सिंह है।