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Kushinagar News: सावन के अंतिम सोमवार पर शिवालयों में उमड़े श्रद्धालु

Tue, 20 Aug 2024 05:07 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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पडरौना। सावन के अंतिम सोमवार को शिवालयों में श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। हर हर महादेव के जयघोष के बीच श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा व भक्तिभाव से जलाभिषेक किया। हर तरफ आस्था का सागर हिलोरें ले रहा था। श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। सुबह से ही शिव मंदिरों में लंबी कतार लग गई। इनमें महिलाओं की संख्या अधिक रही। प्रसिद्ध कुबेरस्थान धाम में करीब एक किलोमीटर तक लंबी कतार में खड़े श्रद्धालु हर हर, बम बम करते रहे।
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नगर के भारतीय शिवाला मंदिर, करहिया शिवमंदिर, पथलेश्वरनाथ शिव मंदिर, भन्नुनाथ शिवमंदिर, लमुहा शिवमंदिर, सिद्धनाथ समेत सभी शिवालयों में भोर से ही श्रद्धालुओं की कतार लगनी शुरू हो गई। देर शाम तक लोगों ने पूजा की। दोपहर बाद कई शिवभक्तों ने शिवालयों में रुद्राभिषेक किया। श्रद्धालु धतूर, भांग, मदार के फूल साथ अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर भूत भावन भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने में जुटे रहे। आचार्य ने बताया कि शिव पुराण के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए श्रावण मास में ही कठोर साधना की थी। भगवान शिव ने मनोकामना पूर्ण करते हुए उनसे विवाह किया। इसी कारण भगवान शिव को श्रावण मास अतिप्रिय है।
कुबेरस्थान मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चौकसी रही। मंदिर के महंत राजकुमार गिरी स्वयं गर्भगृह की व्यवस्था संभाले हुए थे। सिधुआं बाबा स्थान पर भी श्रद्धालुओं की भीड़ रही। बूढ़े, बच्चे व नौजवान सभी समान भाव से कतार में खड़े बाबा का दर्शन करने के लिए इंतजार करते रहे।
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तमकुहीरोड प्रतिनिधि के अनुसार सेवरही क्षेत्र में सावन के पांचवें व अंतिम सोमवार को बाबा पंचेश्वरनाथ शिव मंदिर शिवा घाट, बाबा बिंदेश्वरीदास शिव मंदिर बेलवारी पट्टी, विश्वकर्मा शिव मंदिर जवाहर नगर, रामजानकी शिव मंदिर पुरानी पुलिस चौकी चौराहा, शिव मंदिर सिंचाई विभाग, राजेंद्र नगर, राजपुर खाश, पिरोजहा, राजपुर बगहा, मलाही टोला, कत्तौरा, सुमही संतपट्टी, परसा, अहिरौली मिश्र, अहिरौलीदान, दोमाठ, जगदीश पुर, मिश्रौली, रकबा दुलमापट्टी, गल्ला मंडी, चखनी, बभनौली, दवनहा आदि शिव मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। इन मंदिरों में शिव भक्तों ने हर हर महादेव के जयघोष के साथ भगवान शिव की पूजा अर्चना कर जलाभिषेक किया। कई गांव में गाजे बाजे के साथ कलश यात्रा निकाल कर श्रद्धालुओं ने बांसी नदी और गंडक नदी का जल भरा और मंदिरों में भगवान शिव का जलाभिषेक किया।
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