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Kushinagar News: अधिक ब्याज के फेर में गंवाई रकम, अब वापसी की आस

Fri, 11 Aug 2023 12:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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रकम वापसी के लिए तहसील कार्यालय में आवेदन जाम करने के लिए कतार में खड़े पीड़ित। संवाद
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फोटो है।
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तहसीलों में जमा कराए जा रहे चिट फंड कंपनियों में रकम जमा करने वालों के आवेदन

संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। निजी बैंक खोलकर लोगों के रुपये लेकर भागने वाली चिट फंड फाइनेंस कंपनियों में डूबी रकम वापस मिलने की उम्मीद जगी है। केंद्र स्तर से सहारा पर बकाया रकम लोगों को दिलाई जा रही है तो अब सीएम के निर्देश पर शासन ने प्रदेश में इस पर सख्त कदम उठाए हैं। तहसीलों में ऐसे लोगों के आवेदन पत्र जमा कराए जा रहे हैं, जिनकी रकम डूब चुकी है।
सदर तहसील में बने काउंटर पर बीते एक सप्ताह के भीतर अब तक करीब दो हजार से अधिक लोगों ने अपने आवेदन जमा करा दिए हैं। माना जा रहा है कि सहारा की तर्ज पर बाकी ऐसी कंपनियों की जब्त संपत्तियों को भी नीलाम करके जमाकर्ताओं की रकम वापस दिलाई जाएगी।
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अधिकारियों का कहना है कि आवेदन जमा कराने की अंतिम समय सीमा तय नहीं है, लेकिन जितनी जल्दी लोग फाॅर्म भरकर दे देंगे। उतनी जल्दी लोगों की रकम वापसी की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। एक अनुमान के अनुसार तीन करोड़ से अधिक रकम लेकर चिट फंड कंपनियां भागी हैं, जिनमें हर कंपनी में 10 से 15 लाख रुपये लोगों ने जमा कराए हैं।
जिले में निजी बैंक (चिट फंड कंपनी) खोलकर फाइनेंस कंपनियों ने लोगों को कम समय में अधिक ब्याज का लाभ देने का झांसा दिया। जगह-जगह संबंधित बैंक की शाखाएं खोलकर एजेंटों के माध्यम से रुपये जमा कराए। भुगतान के लिए समय सीमा पूरी होने के पहले ही जमा-पूंजी लेकर कंपनियां भाग गईं। इनमें कुछ ऐसी भी हैं।
ऐसे प्रकरणों को देखते हुए शासन ने जमाकर्ताओं के पक्ष में कार्रवाई शुरू कर दी है। शासन के निर्देश पर डीएम के माध्यम से बड्स एक्ट 2019 (अधिनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम) के तहत रकम वापसी कराने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए। इसके तहत सदर तहसील सहित अन्य सभी तहसीलों में अलग से काउंटर बनाकर कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। एक अगस्त से चल रही प्रक्रिया में पीड़ित अपने आवेदन पत्र जमा करा रहे हैं।
तहसील कार्यालय में आवेदकों को आधार कार्ड, बैंक पास बुक, फर्म में जमा राशि का बांड, अंतिम रसीद की फोटो काॅपी समेत भरे हुए आवेदन पत्र के साथ जमा कराना है। पीड़ित का मोबाइल नंबर आवेदन फार्म पर स्पष्ट रूप से किया जाएगा। आवेदन फार्म में जमा कराई रकम के संबंध में पालिसी संख्या, किस्त की राशि, किस्तों की संख्या, कुल जमा राशि, आरंभ की तिथि और परिपक्वता तिथि का जिक्र करना है।
आवेदन के दौरान आवेदक को कुल जमा राशि का तीन गुना पैसा, उसके ब्याज और हर्जे खर्चे के साथ भुगतान की राशि लिखनी है। अधिकारियों का कहना है कि आवेदन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शासन की ओर से बैठक होगी। इसके बाद आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके बारे में जानकारी दी जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि अभी इस प्रक्रिया में राष्ट्रीय सहारा बैंक को शामिल नहीं किया गया है। उसके अलावा अन्य कंपनियों का पैसा ही लौटाने के लिए आवेदन लिया जा रहा है।



सोचे थे पैसा दुकान में लगाएंगे, लेकिन कंपनी ही भाग गई
बृहस्पतिवार को तमकुहीराज तहसील गेट के पास चिट फंड कंपनी में जमा रकम निकालने के लिए किराना दुकान चला रहे चंदन गुप्ता पुराने कागज में से जाम रकम की रसीद खोज रहे थे। उसी समय कुछ सामान खरीदने कस्बा के एक बुजुर्ग ने पूछा कि सेठ जी क्या तलाश कर रहे हैं। इस पर दुकानदार ने कहा कि चाचा कस्बा में कुछ वर्ष पहले एक कंपनी का कार्यालय खुला था। प्रतिदिन सौ रुपये जाम कराती थी। कही थी जमा धनराशि का दूना मिलेगा। सोचा था कि एक मुश्त रुपये मिलेंगे तो दुकान में लगाऊंगा। लेकिन करीब छह माह बाद सारा रुपये लेकर भाग गई।

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पीड़ित बोले

लतवा बाजार में एक कंपनी का कार्यालय खुला था। कंपनी के कर्मचारियों ने कहा कि जमा रकम का दोगुना मिलेगा। उनकी बातों में आकर प्रतिदिन 50 रुपये का खाता खोला था। समय पूरा होने पर रकम की मांग के लिए दौड़ता रहा है, लेकिन कंपनी के कर्मचारी आश्वासन देते रहे। एक दिन कंपनी के कर्मचारी कार्यालय बंद कर भाग गए। अब रुपये वापस मिलने की उम्मीद जगी है।

- तुलसी चौहान, पीड़ित व्यापारी


एक कंपनी में 62 हजार रुपये जमा किए थे। सोचा था कि व्यवसाय बढ़ाने में काम आएगा, लेकिन पैसा नहीं मिल पाया। सरकार के इस पहल से रुपये वापस मिलने की उम्मीद जगी है।

- धीरज पांडेय, रामपुर राजा

कस्बा में खुली एक कंपनी के कार्यालय में काम करने वाले एक कर्मचारी की बात में आकर 60 हजार जमा किए थे। कंपनी के लोगों ने जमा रुपये से अधिक देने का वादा किया था। कंपनी के भागे करीब पांच वर्ष हो गए। उसमें काम करने वाले कर्मचारी भी दिखाई नहीं देते हैं। हम लोग तो मान चुके थे कि रुपये अब डूब गए, लेकिन सरकार की यह पहल सराहनीय है।

- विजय मद्धेशिया, तमकुहीराज


एक चिट फंड कंपनी में 20 हजार रुपये जमा किए थे। कंपनी की तरफ से मिला समय पूरा होने से पहले ही कार्यालय बंद हो गया। इससे रुपये डूब गए हैं। रकम वापसी के लिए आवेदन जमा किया हूं।
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- आसमुहम्मद अली, निवासी परसौनी बुजुर्ग
कोट

जिले में कितनी रकम लेकर चिट फंड कंपनियां भागी हैं, आवेदकों के फार्म आने के बाद इसकी सटीक जानकारी हो सकेगी। अभी आवेदन पत्र जमा कराए जा रहे हैं। इसके बाद शासन के निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

- वैभव मिश्र, एडीएम वित्त एवं राजस्व, कुशीनगर
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