तमकुहीरोड। बड़ी गंडक नदी के जलस्तर में कमी होने के बाद भी कटान का खतरा बना हुआ है। नदी के निशाने पर आये विरवट कोन्हवलिया में बुधवार की देर शाम एक बार फिर कटान की स्थिति उत्पन्न हो गई। अभियंताओं की मौजूदगी में देर रात तक बचाव कार्य चला। बृहस्पतिवार को भी संभावित कटान वाले स्थलों पर बाढ़ खंड की ओर से बचाव कार्य कराया गया। गांव वालों का कहना है कि जब तक बांध को सुरक्षित नहीं किया जाएगा, तब तक कटान की स्थिति उत्पन्न होती रहेगी।
बड़ी गंडक नदी के जलस्तर में तीन दिनों से कमी हो रही है। बावजूद इसके विरवट कोन्हवलिया में एपी बांध के किमी 7.000 से किमी 7.350 के बीच कटान का खतरा बना हुआ है। तीन दिन पहले नदी ने बांध को निशाने पर ले लिया था, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई थी। काफी मशक्कत के बाद कटान को रोकने में विभाग को सफलता मिली। तभी से एसडीओ रमेश यादव की अगुवाई में जेई चंद्रप्रकाश, रमेशधर दुबे, सुनील कुमार यादव, विनोद शर्मा, रामचंद्र प्रसाद, बृजमोहन कुशवाहा बंधे पर लगातार कैम्प कर रहे हैं। बुधवार की देर शाम भी बचाव कार्य का एक हिस्सा नदी में धंस गया। इससे नदी कटान करने लगी। इसके बाद सभी अभियंता समेत ग्राम प्रधान प्रतिनिधि आनंद कुमार सिंह, राहुल सिंह, रोहित यादव, शैलेन्द्र सिंह, बीरबल शर्मा, लालजी कुशवाहा, मैनुद्दीन अंसारी आदि लोग बांध पर पहुंच गए और देर रात तक नदी में बोल्डर गिराने का कार्य चलता रहा। यह बचाव कार्य बृहस्पतिवार को भी जारी रहा। गांव वालों का कहना है कि जलस्तर में कमी के बाद भी नदी बांध से सटकर बह रही है, जो किसी खतरे से कम नहीं है। ऐसे में जब तक बांध को सुरक्षित नहीं किया जाएगा, तब तक कटान का खतरा बना रहेगा। इस संबंध में बाढ़ खंड सेवरही के एसडीओ रमेश यादव ने बताया कि बांध की निगरानी के साथ युद्धस्तर पर बचाव कार्य चल रहा है।