तमकुहीरोड। बड़ी गंडक नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु के करीब पहुंच गया है। नरवाजोत बंधे से फिलहाल खतरा टल गया है लेकिन, नदी अब विरवट कोन्हवलिया के ठोकर नंबर चार के पास दबाव बनाते हुए कटान कर रही है। कटान को रोकने के लिए बाढ़ खंड के अभियंता लगे हैं। शनिवार की पूरी रात अभियंता बांध पर बचाव कार्य में जुटे रहे। बोल्डर की डंपिंग कराकर बांध को सुरक्षित किया जा रहा है। खतरे वाली जगहों पर जेसीबी से सफाई भी कराई जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते बांध को सुरक्षित नहीं किया गया तो नदी कभी भी कहर बरपा सकती है।
जलस्तर में उतार-चढ़ाव के कारण पहले बड़ी गंडक नदी ने नरवाजोत को निशाने पर लिया था। बचाव कार्य के बाद नरवाजोत बांध पर से खतरा तो टल गया है, लेकिन अब नदी विरवट कोन्हवलिया के ठोकर नंबर चार पर तेजी से दबाव बनाने लगी है। नदी के निशाने पर ठोकर नंबर चार (कट एंड टू बांध) है, जहां पिछले एक सप्ताह से कटान करते हुए नदी फसल और उपजाऊ जमीन को अपनी आगोश में ले रही है। अब तक 30 से 40 किसानों की फसल नदी की भेंट चढ़ चुकी है।
खतरे को देखते हुए बाढ़ खंड के जिम्मेदार भी चौकन्ना हो गए हैं। शनिवार की शाम एक्सईएन एमके सिंह ने कटान की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कटान रोकने के लिए सभी जरुरी कदम उठाए जाने का निर्देश दिया। एक्सईएन के जाने के बाद अभियंताओं ने सक्रियता दिखाई और पूरी रात बंधे पर रहकर बचाव कार्य कराया। एसडीओ रमेश यादव के साथ जेई चंद्रप्रकाश, जेई रमेशधर दुबे, जेई सुनील यादव, जेई विनोद शर्मा, जेई रामचंद्र प्रसाद पूरी रात तटबंधों की निगरानी में जुटे रहे। रविवार की शाम तक बोल्डर डंपिंग कराकर कटान रोकने की कवायद की गई।
खतरे वाली जगहों पर जेसीबी से सफाई कराई जा रही है। क्षेत्र के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि आनंद कुमार सिंह, वीरेश्वर सिंह, अरुण सिंह, गौतम सिंह, बबलू प्रसाद, संतोष शर्मा, हरकेश कुशवाहा आदि का कहना है कि बंधे से सटे ही घनी आबादी वाला विरवट कोन्हवलिया गांव है। ऐसे में बांध सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम किया जाना चाहिए ताकि किसी प्रकार के खतरे की आशंका उत्पन्न न हो सके। इस संबंध में एसडीओ रमेश यादव ने बताया कि बांध सुरक्षा के इंतजाम किए जा रहे हैं और साथ ही तटबंधों की चौकसी भी की जा रही है। फिलहाल तटबंध पूरी तरह सुरक्षित है और कहीं से कोई खतरा नहीं है।