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Kushinagar News: बारिश से फसलें हुईं बर्बाद, मुआवजे की नहीं आस

Thu, 23 Mar 2023 01:07 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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जिले में करीब छह लाख किसान, 41, 800 करा रखा है रबी की फसल का बीमा
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दो दिनों हुई बारिश से दो हेक्टेयर फसलें खेतों में गिर गईं
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। बारिश और ओलावृष्टि से कसया, फाजिलनगर, हाटा और तमकुहीराज में किसानों की करीब दो हेक्टेयर फसलें खेतों में गिर गईं। गेहूं के अलावा सरसों की फसल भी प्रभावित हुई है। इससे किसान परेशान हैं, क्योंकि पूर्व हुए नुकसान की भरपाई अब तक नहीं हो पाई है। किसानों का कहना है कि बारिश से बर्बाद हुए हैं, लेकिन मुआवजे की आस नहीं है।
जिले में 223836 हेक्टेयर भूमि पर खेती होती है। इस साल 116000 हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की बुआई की गई है, जबकि अन्य भूमि पर सरसों, गन्ना, आलू सहित अन्य फसलों का उत्पादन होता है। करीब छह लाख किसान हैं। इनमें से 41, 800 लोगों ने रबी फसल के लिए बीमा करा रखा है। किसानों का कहना है कि पहले भी उन्हें मुआवजा नहीं मिल पाया था। इस बार भी उम्मीद नहीं है।
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रविवार और सोमवार को बारिश हुई थी। मंगलवार की रात में भी बूंदाबांदी हुई। इसका असर पडरौना, कसया, हाटा, तमकुहीराज, कप्तानगंज, रामकोला, मंसाछापर, खड्डा, जटहां बाजार सहित अन्य जगहों पर नजर आया। फाजिननगर क्षेत्र के बेलवा, बरदहा, पचरुखीय, खैरटिया, कस्तूरबा, विशुनपुरा, अमवा, लक्ष्मीपुर, बड़हरा, चौरा, नोनियापट्टी, परसौनी आदि गांवों में तेज बारिश के साथ ओलावृष्टि से गेहूं, सरसों, मसूर और आलू की फसल को नुकसान पहुंचा है। गन्ने की खेती भी प्रभावित हुई।

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बारिश की वजह से गेहूं की फसल खेतों में गिर गईं। सरसों को भी नुकसान पहुंचा है। खेत में गिरी फसल सड़ जाएगी। प्रशासन को चाहिए कि खेतों का सर्वे कराकर मुआवजा दिलाने का प्रबंध करें।
रामाकांत, किसान
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पहले भी प्राकृतिक आपदा आई है। किसानों को मुआवजा मिलने की आस हर बार रहती है, लेकिन इस बार आंशिक नुकसान का हवाला देकर प्रशासन मुआवजा देने से मना कर सकता है।
-विशुन दयाल कुशवाहा, किसान
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बेमौसम बारिश सहित अन्य तरह की आपदों का सामना करना पड़ता है। मुआवजा देने की बात तो की जाती है, लेकिन मिलता नहीं है। सभी जगहों पर क्षति का आंकलन कराकर किसानों को आर्थिक मदद मिलनी चाहिए।
-राजेंद्र पांडेय, किसान
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घर खर्च से लेकर शादी-ब्याह तक खेती पर निर्भर
खेती से किसानों के परिवार का खर्च चलता है। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, शादी-ब्याह तक सभी चीजें खेती पर निर्भर रहती हैं। फसलों काे नुकसान पहुंसने से समस्या खड़ी हो जाती है। मेला नरहवा गांव के किसान श्रवण तिवारी, नरहवा डीह के शिवलाल कुशवाहा, नंदलाल, मदन सेन शर्मा आदि ने बताया कि कुछ बड़े किसानों को छोड़ दिया जाए तो छोटे किसानों को सरकार से कोई मदद नहीं मिल पाती है।
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फसल बीमा कराने पर मिलता है लाभ
जागरूकता के अभाव में किसान बीमा नहीं कराते हैं। जिले में छह लाख किसानों में महज 41800 किसानों ने बीमा करा रखा है। जिला कृषि अधिकारी बीआर मौर्या ने बताया कि बीमित किसानों को संबंधित बीमा कंपनी से लाभ मिलता है। सरकार की तरफ से मुआवजा देने का मानक तय है। 33 फीसदी से अधिक फसल का नुकसान होने पर मुआवजा देने का नियम है। लेखपाल और राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट पर यह मुआवजा दिया जाता है।
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एक साल बाद भी 263 किसानों को नहीं मिला मुआवजा
वर्ष 2022 के फरवरी में ओलावृष्टि सहित अन्य प्राकृतिक आपदाओं से 1504 किसानों की फसल को नुकसान पहुंचा था। 1504 किसान प्रभावित हुए थे। इन किसानों का करीब 31,05351 रुपये का मुआवजा बना था। खड्डा और तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के 263 किसानों का मुआवजा बैंक खाते में नहीं पहुंच सका है। जिला प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि किसानों का बैंक खाता और आधार कार्ड नंबर मेल नहीं खा रहा है। इस वजह से 263 किसानों का भुगतान नहीं हो पा रहा है। जल्द ही इन किसानों का पैसा भी उनके खाते में भेज दिया जाएगा।
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कोट
हाल के दिनों में हुई बारिश और ओलावृष्टि से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए लेखपालों को निर्देश दिए गए हैं। इसकी रिपोर्ट जल्द मांगी गई है। रिपोर्ट के आधार पर हुई क्षति की भरपाई की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। पिछले साल के 263 किसानों का पैसा उनके खाते में नहीं पहुंच सका है। बैंक खाता संख्या और आधार कार्ड नंबर को प्रमाणित कराया जा रहा है। जल्द ही सभी का भुगतान हो जाएगा।
देवीदयाल वर्मा, एडीएम
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