खड्डा। बिहार के वाल्मिकी ब्याघ्र परियोजना में हुए नौ बाघों की हत्या के मामले में जेल में बंद मास्टरमाइंड हरी गुरो की संदिग्ध हालात में बुधवार की शाम मौत हो गई थी। 62 वर्षीय हरी गुरो ने जब आखिरी सांस ली तो उसके हाथों में हथकड़ी के साथ ही पुलिस का पहरा था।
उसका शव बृहस्पतिवार को परिवार के लोगों केहवाले कर दिया गया। कला गांव में फरवरी माह में पुलिस ने छापा मारकर दो बाघों का खाल और हड्डियां बरामद की थी। उस समय चंद्रदेव महतो और कृष्णदेव को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। पकड़े गए लोगों से पूछताछ में पुलिस बाघों के मारने के खेल में हरी गुरो का नाम प्रकाश में आया था, जिससे हड़कंप मच गया था।
हरी गुरो के सुराग में लगी पुलिस ने मार्च महीने में नेपाल सीमा से उसे पकड़ लिया। पुलिस पूछताछ में हरी गुरो ने बताया था कि बाघों की हत्या कर अंगों की तस्करी की जाती है। इसके अलावा उसने बताया था कि मांस और खून का भी वह सेवन खुद करता था। यह कार्य उसकी ओर से इस अंधविश्वास की वजह से किया जा रहा था कि बाघ के खून और मांस के सेवन से जीवन में कभी बुढ़ापा नहीं आएगा।
उसके यह बयान सबको हैरान करने वाले थे। बाघों को मारने वाला शिकारी गिरोह जंगल में जानवरों को मारकर उनके मृत शरीर में जहर डाल देते थे, जिसे उन रास्तों से गुजर रहे बाघ उन जहरीले जानवरों का मांस खाकर मर जाते थे। जेल में पूछताछ के दौरान हरी गुरो नौ बाघों की हत्या करने साथ ही कीमती अंगों को नेपाल और चीन सहित दिल्ली के तस्करों को बेचने की बात भी कबूली थी।
इसमें पुलिस ने हरी गुरो की पत्नी सहित 11 लोगों को गिरफ्तार करके जेल भेजा था। आरोपी हरी इस प्रकरण में बगहा जेल में बंद था, उसकी अचानक तबीयत बिगड़ी और बुधवार की शाम मौत हो गई थी। मौत के वक्त भी उसके हाथों में हथकड़ी लगी हुई थी। पुलिस कर्मी जेल में पहरा दे रहे थे। पोस्टमार्टम कराने के बाद अंतिम संस्कार के लिए शव परिजनों के हवाले कर दिया गया।