विद्याधर तिवारी
खड्डा (कुशीनगर)। चिर युवा बने रहने की हसरत और अंगों की तस्करी की नीयत से बाघों की हत्या करने के आरोप में घिरे हरि गुरो के तार बिहार के अलावा यूपी, दिल्ली नेपाल के तस्करों से जुड़े थे। इनको बाघ या अन्य वन्य जीव की खाल तथा अंग सौंपकर मनमानी कीमत वसूलते थे।
इस काम में उसके घर के कई सदस्य भी मददगार की भूमिका में शामिल रहते थे। हरि गुरो की गिरफ्तारी के बाद से पूछताछ में लगी टीम को पता चला है कि वन्य जीवों की तस्करी में असल भूमिका दिल्ली, यूपी, नेपाल और बिहार में सफेदपोश की तरह रहने वाले कुछ लोगों की थी।
हरि गुरो और उसके गैंग के अन्य लोग नेटवर्क में शामिल बड़े लोगों की मांग के आधार पर भी जानवर की तलाश पूरी करते थे। प्रतिबंधित वन्य क्षेत्र में घुसपैठ करके कुछ ऐसे जानवरों को मारकर उनके शरीर में जहर मिला देते, जो दूसरे बड़े जानवरों का आहार बनते हैं।
इनको निवाला बनाने वाले जानवर की हालत बिगड़ते ही कब्जे में लेकर हत्या कर देते थे और खाल तथा अन्य अंग अलग करके मनमानी कीमत पर बेचते थे। उसकी पत्नी, दामाद, भाई सहित कुछ अन्य रिश्तेदारों के इस गैंग में शामिल होने की जानकारी के बाद उनकी भी तलाश की जा रही है।