नेबुआ रायगंज/कोटवा बाजार (कुशीनगर) ।
नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र के नौरंगिया-घुघली मार्ग पर कौवसार चौराहे के पास गंडक नहर की खजुरिया शाखा के पुल की रेलिंग से टकराकर एक बाइक पर सवार तीन युवक नहर में गिर गए। इनमें से एक की डूबने से मौत हो गई, जबकि बाइक चला रहा युवक हेलमेट पहने होने की वजह से सिर में चोट लगने के बाद भी बच गया। उसका इलाज चल रहा है। नहर में गिरे तीसरे युवक का करीब 20 घंटे बाद भी पता नहीं चल सका है। पुलिस के देर से आने से नाराज लोगों ने करीब छह घंटे तक नौरंगिया-घुघली मार्ग को जाम रखा।
रायपुर खास निवासी रामप्रीत गुप्ता के बेटे के गवना की बारात सोमवार की रात में खड्डा इलाके के बरवा रतनपुर गांव जा रही थी। इस बारात में रामकोला के नौगांवा निवासी लालजी गुप्ता (35) तथा महराजगंज जिले के पकड़ी दीक्षित गांव निवासी परभंस गुप्ता व कोठीभार के रानीपुर मझौवा गांव निवासी सुभाष गुप्ता एक ही बाइक से जा रहे थे। सोमवार की रात करीब 10 बजे कौवसार चौराहे पर पुल की टूटी रेलिंग से बाइक टकरा गई। तीनों बाइक समेत नहर में जा गिरे। लोगों ने बाइक और उसे चला रहे सुभाष गुप्ता को बाहर निकाला गया। देर रात परभंस का शव मिला। टक्कर इतनी तेज थी कि सुभाष का हेलमेट टूट गया पर इसे पहने होने के कारण ही सिर में कम चोट लगी। उन्हें रात में ही घुघली सीएचसी फिर महराजगंज सदर अस्पताल ले जाया गया।
नहर में गिरे तीसरे युवक लालजी गुप्ता की तलाश बुधवार को दिनभर होती रही। घटनास्थल पर पुलिस के देर से आने और टूटी रेलिंग को ठीक नहीं कराने से नाराज लोगों ने नौरंगिया-घुघली मार्ग को जाम कर दिया। सुबह सात बजे से शुरू हुआ जाम दोपहर एक बजे तक चला। सिंचाई विभाग के एक्सईएन एके मौर्या, एसडीओ आरएन सिंह, जेई रवि प्रकाश के आश्वासन पर जाम खत्म हुआ। एसओ श्रीप्रकाश यादव ने बताया कि लापता युवक की तलाश की जा रही है।
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पिछले वर्ष भी हुआ था हादसा
कौवासार पुल की रेलिंग टूटने से पिछले वर्ष 20 जून को भी बड़ा हादसा हुआ था। तब नेबुआ नौरंगिया के कुर्मीपट्टी के टोला केरवनिया निवासी होरिल साहनी के घर से लौट रही बारात में शामिल बोलेरो नहर में गिर गई। हादसे में दो लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद भी रेलिंग की मरम्मत नहीं कराई गई।
प्रशासन ने लगाया संवेदनहीनता का आरोप
जाम लगाए लोगों के बीच पहुंचे भाजपा और हियुवा नेताओं ने ने प्रशासन व सिंचाई विभाग की लापरवाही को हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराया। विजय मिश्रा, ताराचंद, वशिंदर उपाध्याय, पप्पू अंसारी आदि का कहना था कि ऐसी घटनाएं सरकार की बदनामी की वजह बन रही हैं।