खड्डा। विकास खंड खड्डा में मनरेगा योजना में घपलेबाजी का मामला उजागर हुआ तो हड़कंप मच गया। बीडीओ के डिजिटल हस्ताक्षर व पासवर्ड का दुरुपयोग कर बिना टेंडर व कार्य कराए ही चहेते फर्मों के नाम लाखों का भुगतान कर सरकारी धन की बंदरबांट की गई। इस मामले में कंप्यूटर ऑपरेटर समेत अन्य के खिलाफ खड्डा थाने में धोखाधड़ी, कूट रचना आदि गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ।
बीडीओ कार्तिकेय मिश्रा को घपले की जानकारी मिली तो उन्होंने अपने स्तर से छानबीन शुरु की। कारीब चार साल से खंड विकास अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षर व पासवर्ड का दुरुपयोग करते हुए तथा मनरेगा सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ करके क्षेत्र पंचायत, ग्राम पंचायत आदि में बिना टेंडर, निविदा व धरातल पर कार्य किए ही लगभग डेढ़ सौ योजनाओं के इंटरलॉकिंग और सोलिंग आदि का काम दिखाकर शुभम इंटर प्राइजेज फर्म, जय माता दी ईंट उद्योग आदि के नाम से अलग-अलग तिथियों में लगभग 30 लाख रुपये प्रथम दृष्टया उनके बैंक खाते में भुगतान करने का मामला उजागर हुआ। प्रारंभिक छानबीन में वित्तीय अनियमितता में ब्लॉक का दैनिक वेतन भोगी कंप्यूटर ऑपरेटर मनोज यादव की संलिप्ता पाई गई। सूत्रों की मानें तो घोटाले की रकम का आंकड़ा करोड़ से ऊपर जा सकता है।
चलता रहा घपले का खेल, अनभिज्ञ रहे जिम्मेदार
वर्ष 2007 से वर्ष 2010 के बीच मनरेगा योजना में हुई अनियमितता की जांच सीबीआई ने करके तमाम आरोपियों को जेल भेजा था, लेकिन इसका भी डर मनरेगा के जिम्मेदारों को नहीं रहा। सवाल उठता है कि चार साल से यह गड़बड़ी चलती रही, लेकिन किसी की पकड़ में नहीं आई। लोग अब सवाल उठा रहे हैं कि अकेले ऑपरेटर के वश का तो नहीं लगता यह खेल। सीमित मानदेय पाने वाले ऑपरेटर मनोज यादव के गांव चमरडीहा में बनी आलीशान कोठी व लाइफ स्टाइल में आए बदलाव से भी लोग हैरान थे। हर साल होने वाले ऑडिट में भी गड़बड़ी पकड़ में नहीं आना हैरान कर रही थी। अचानक इतनी बड़ी सरकारी धन की गड़बड़ी पुन: उजागर होने से विकास की गंगा बहाने वाले इस संस्थान पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रभारी निरीक्षक अनुज सिंह ने बताया कि ब्लॉक के लिपिक शत्रुघ्न चौधरी की तहरीर पर ऑपरेटर मनोज यादव आदि के विरुद्ध धोखाधड़ी, कूटरचना और गबन आदि धारा में मुकदमा दर्जकर विवेचना की जा रही है। प्रथम दृष्टया इसमें ऊपर तक विभागीय लोगों की संलिप्ता का संदेह है। दोषी शीघ्र गिरफ्तार किए जाएंगे।