कुशीनगर के दुदही में ट्रेन दुर्घटना में अमरजीत के तीनो बच्चों की मौत कि सूचना पर विलाप करते परिजन ।
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दुदही (कु्शीनगर)। रेल हादसे ने किसी घर की सारी खुशियां छीन ली है तो कइयों के घर का चिराग बुझ गया हैं। पांच गांवों में मातम पसरा है। सबकी जुबान पर बस एक ही बात है कि भगवान भी इतना बेरहम कैसे हो सकता है। जिसने भी एक साथ 13 मासूूमों की खून से सनी लाशें देखी, कलेजा मुंह को आ गया। मिश्रौली गांव के अमरजीत और ग्राम प्रधान पत्नी किरन की दुनियां ही उजड़ गई। उनके तीन मासूम (अनूप, रवि, रागिनी) काल के गाल में समा गए। इससे भी दुखद यह है कि किरण ने नसबंदी करा ली है। अमरजीत के घर पहुंचे लोगों की जुबां पर बस एक ही बात थी, बड़े अभागे हैं दोनों। अब तो इनके आंगन में किलकारियां कैसे गूंजेंगी। अमरजीत के पिता हरिहर आने जाने वालों पर टकटकी लगाए थे। कभी वे दूसरों को ढांढस बंधा रहे थे तो कभी फफक पड़ रहे थे। बोले, सुबह तीनों बच्चों स्कूल जा रहे थे, वैन में बैठे तो बोले कि बाबा शाम को हमें घुमाने ले जाइएगा। इतना ही कहते हरिहर दहाड़े मारने लगे।
कभी फफकती तो कभी गुमसुम हो जाती है सलमा
दुदही के मइरहवा टोले में मैनुद्दीन के घर चीख पुकार मची थी। खुद मैनुद्दीन करीब आठ दिन पहले ही रोजगार के सिलसिले में सऊदी अरब गए थे। उनकी पत्नी सलमा खातून का रो रोकर बुरा हाल है। कभी वे दहाड़े मारकर रोती हैं तो कभी गुमसुम हो जाती हैं। उनके भतीजे मन्नन अंसारी बताते हैं, सुबह छह बजे वैन से सेराज और मुस्कान स्कूल गए थे। करीब सवा सात बजे फोन आया कि जिस वैन से बच्चे गए थे उसका एक्सीडेंट हो गया है। भागकर मौके पर पहुंचा तो दोनों बच्चे इस दुनिया को अलविदा कह चुके थे।
घर पर पत्नी बेसुध और हैदर सऊदी में बेहाल
पड़रौन, मड़रही में हैदर अली के घर कोहराम मचा था। उनके दो बेटे गोलू और कमरूल भी हादसे के शिकार हो चुके हैं। हैदर अली सऊदी अरब में हैं, बच्चों की मौत की सूचना मिलते ही बदहवास हो गए। कई बार फोन कर पत्नी रुखसार को समझाने की कोशिश करते रहे। पत्नी बार-बार अपने बच्चों को सामने लाने की जिद कर रही थीं। कई बार तो उन्होंने यह मानने से ही इन्कार कर दिया कि बच्चे अब नहीं रहे। उन्हें संभालने की कोशिश करने वालों की हिम्मत भी टूट जा रही थी। दिल को झकझोर देने वाला दृश्य जिसने भी देखा वह खुद को रोक नहीं सका और सबकी आंखें नम हो गईं।