खड्डा। मंगलवार को दोपहर में गंडक में छोटी नाव पलट जाने से आठ लोग डूब गए। लोगों की गुहार पर आस-पास लकड़ी छान रहे नाविकों ने दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सभी को सुरक्षित बचा लिया। घटना सूचना से डूब परिवारों में कोहराम मच गया।
खड्डा थाना क्षेत्र के भैसहा गांव निवासी जेली उर्फ रमेश 35 वर्ष, विग्गु यादव 25 वर्ष, भेड़ीहारी गांव निवासी राजू यादव 35 वर्ष, मदनपुर गांव निवासी जितेंद्र यादव 28 वर्ष, वकील भारती 20 वर्ष, लाल प्रताप 45 वर्ष और ग्राम सभा गैनही जंगल निवासी रामदेनी 37 वर्ष, देवराज 50 वर्ष प्रतिदिन की तरह मंगलवार को राजू यादव की नाव से नदी उस पार गहनू घाट के पास जा रहे थे। नाव पर उस समय लगभग तीन क्वितंल दूध लेकर लौट रहे थे। नाव पर सवार बिग्गू ने बताया कि आधे रास्ते तक पहुंचे ही थे, तभी अचानक नाव तेज लहर में फंस गई। पानी की तेज लहरों में डूब पलट जाने से उस पर सवार आठ लोग डूबने लगे। डूबी नाव व बांस के पतवार, दूध के डिब्बे आदि को पकड़ कर डूबते लोग जान बचाने की कोशिश शुरू किए और गुहार लगाई। गुहार सुनकर नदी में कुछ दूरी पर लकड़ी छान रहे नाविक अपनी नाव लेकर दौड़े। लगभग दो किलोमीटर तक पीछा करते हुए एक साथ बह रहे छह लोगों को बचा लिया। जबकि दूसरी नाव पर सवार लोगों ने डूब रहे दो अन्य लोगों बचाया। नाव पलटने की जानकारी होते ही गांव में हड़कंप मच गया, लेकिन सभी के सुरक्षित होने पर परिजनों ने राहत की सांस ली।
प्रशासन की बेरुखी से जान जोखिम में डाल रहे लोग
खड्डा। एक सप्ताह पूर्व मंगलवार को ही उसी जगह पर दो नाव पलट जाने से सात लोग डूबे थे। जिसमें से पांच लोगों को दूसरे नाविकों ने बचा लिया था। जबकि एक किसान की मौत हो गई। डूबे दूसरे किसान का अभी तक पता नहीं चल पाया है। नदी किनारे बसे लोगों के सामने अन्य कोई विकल्प नहीं होने के चलते लोग मजबूरी में यह कदम उठा रहे हैं। एसडीएम खड्डा अरविंद कुमार ने बताया कि छोटी नाव चलाने से मना किया गया था, लेकिन मजबूरी में लोग यह कदम उठा रहे हैं। इन सभी लोगों की बैठक बुलायी गई है।
दूध का डब्बा और बांस का पतवार बना सहारा
खड्डा। दो घंटे तक मौत से आंख मिचौली खेल कर सुरक्षित बच निकलने के बाद रमेश व विग्गू के चेहरे पर अब भी दहशत बरकरार है। दोनों ने बताया कि नाव पर दूध लादकर लौट रहे थे। नाव की पतवार राजू के हाथ में थी। सभी लोग आराम से बैठे थे। तभी उंची लहरों में नाव फंसकर हिचकोले खाने लगी और उसमें पानी भर गया। दूध से भरा डिब्बा भी बह गया, लेकिन एक खाली डिब्बा था, उसका ढक्कन बंद था, वह पानी में तैरने लगा, उसी को पकड़ कर सहारा लिए रहे। डूबते हुए को तिनके का सहारा मिला और पांच लोग उसके सहारे बहने लगे, तभी पिछे से बड़ी नाव आकर सबको बचा लिया ।दोनों बताते हैं कि हम दोनों बांस की पतवार के सहारे बह रहे थे, तभी दूसरी नाव ने बचा लिया।