अपहृत किशोर की हुई हत्या, शव गन्ने के खेत में मिला
पुराने विवाद में की गई मासूम की गला दबाकर हत्या
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अमर उजाला ब्यूरो
कुबेरस्थान। थाना क्षेत्र के रहसू गांव से चार नवंबर की शाम से अपहृत किशोर का शव बुधवार की दे रात गन्ने के खेत में मिला। किशोर के घरवालों की आशंका के आधार पर हिरासत में लिए गए व्यक्ति ने पूछताछ में उसका अपहरण करने के बाद गला दबाकर हत्या करने की बात स्वीकार की। उसने अपने दो अन्य सहयोगियों का नाम भी बताया। पुलिस ने इन तीनों के खिलाफ केस दर्ज कर जेल भेज दिया।
रहसू गांव के निवासी हरिकेश्वर का 11 वर्षीय पुत्र दिव्यांशु 4 नवंबर की शाम से ही घर से गायब हो गया था। घटना की देर रात ही घरवालों ने गांव के ही शैलेश मिश्र पर उसका अपहरण करने की आशंका जाहिर करते हुए केस दर्ज करा दिया था। घटना के बाद से ही कुबेरस्थान थाने की पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की तो उसने गला दबाकर हत्या की बात स्वीकार कर ली। आरोपी की निशानदेही पर बुधवार की देर रात गांव के दक्षिण गन्ने के खेत से दिव्यांशु का शव मिला। पुलिस ने उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। उसके बाद किशोर का शव परिजनों को सौंप दिया गया, बृहस्पतिवार की देर शाम उसके शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
पुलिस के मुताबिक दिव्यांशु की हत्या पुरानी रंजिश में गला दबाकर की गई है। इसमें गांव के ही 3 व्यक्ति शामिल थे। जिनके खिलाफ अपहरण और हत्या सहित विभिन्न आरोपों में मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार करने के बाद जेल भेज दिया गया।
कुबेरस्थान थाने के एसओ राजेश कुमार मौर्या के मुताबिक मुख्य आरोपी शैलेश मिश्र ने पुलिस की तरफ से की गई कड़ी पूछताछ में बताया कि पुरानी रंजिश को लेकर गांव के ही गोरख मिश्र के कहने पर उसने 11 वर्षीय दिव्यांशु को बीते 4 नवंबर की शाम बहला फुसला अगवा कर लिया था। बाद गांव के ही सुधीर मिश्र के साथ मिलकर दोनों ने दिव्यांशु की गला दबाकर हत्या कर दी थी और शव को गांव के दक्षिण एक गन्ने के खेत मे फेंक दिया था।
इस कार्रवाई में कुबेरस्थान पुलिस के साथ डॉग स्क्वॉड, स्वॉट और सर्विलांस टीम भी लगी हुई थी। उन्होंने बताया कि शैलेश के घर से एक कट्टा तथा कारतूस बरामद हुआ है।जबकि दो अन्य आरोपी गोरख मिश्र और सुधीर मिश्र को शुक्रवार के दिन करीब 12 बजे छावनी से गिरफ्तार कर थाने लाया गया।
दिवाली से पूर्व ही बुझ गया चिराग
कुबेरस्थान। जिस दिन रहसू गांव के सभी लोग दीपावली की तैयारियों में लगे थे, उस दिन हरिकेश्वर मिश्र के परिवार पर विपत्तियों का पहाड़ टूट पड़ा। घर के सभी लोग 11 वर्षीय मासूम दिव्यांशु की खोजबीन में जुटे हुए थे। बीते चार नवंबर की शाम दिव्यांशु के घर से गायब होने के बाद से ही उसके पिता हरिकेश्वर और मां प्रेमलता के अलावा बड़ा भाई रौनक तथा उसकी बहनें रोली, रूप व दिव्यानी दिव्यांशु को याद कर उनकी आंखों से लगातार आंसू बह रहे थे।
कभी कभी तो पूरा परिवार इस कदर बेजार होकर रो रहा था कि देखने वाले भी उनके दर्द को सहन नहीं कर पा रहे थे और उनकी आंखें भी दिव्यांशु को याद कर भर आ रही थीं। फिर भी उसके परिजनों को इस बात की आश थी कि दिव्यांशु जीवित है और वह लौटकर घर जरूर आएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आखिरकार जिस रात गांव के सभी लोग दीपावली की खुशियों में खोए हुए थे उस रात दिव्यांशु के घर में मातम जैसा माहौल था। उस रात दिव्यांशु जीवित तो नहीं मिला, लेकिन उसका शव मिला। वह दो भाई और तीन बहनों में चौथे नंबर का था।