गुरवलिया बाजार। तुर्कपट्टी थाना क्षेत्र के कसया-तमकुही रोड मार्ग पर पंसरवा गांव के निकट नवनिर्मित पुल के नीचे में 25 वर्षीय युवक का शव मिला। जेब में मिले आधारकार्ड से शव की शिनाख्त कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत शिवपुरडीह निवासी शिवपूजन प्रसाद के पुत्र सुनील प्रसाद के रूप में हुई।
लोगों ने हत्या कर शव फेंकने की आशंका जताते हुए सड़क जाम कर दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घटना की जांच कर दोषी के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन देकर दो घंटे बाद जाम समाप्त कराया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
घटना की जानकारी होने पर सीओ सदर नितेश प्रताप सिंह व सेवरही थानाध्यक्ष रामाज्ञा सिंह मौके पर पहुंचे। तुर्कपट्टी पुलिस परिजनों के आए बिना शव ले जाने लगी तो ग्रामीण उग्र हो गए और नारेबाजी करते हुए सड़क जाम कर दी। पुलिस ने किसी तरह समझा-बुझाकर जाम खत्म कराया।
तुर्कपट्टी एसओ तेज जगन्नाथ ने मृतक के पिता शिवपूजन प्रसाद की तहरीर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा पंजीकृत कर लिया। इधर, घटनास्थल पर फोरेंसिक और डॉग स्क्वॉड जांच में जुट गया है। बताया जा रहा है कि युवक अभी कुछ दिन पहले ही खाड़ी देश से आया था और 25 अप्रैल को उसकी शादी थी।
मां को मौसी के घर पहुंचाने आया था युवक
गुरवलिया बाजार। सुनील सोमवार की शाम अपनी मां को लेकर अपने मौसा के घर एक मांगलिक कार्यक्रम में पहुंचाने आया था। रात में घर नहीं पहुंचा तो परिवारवाले चिंतित थे। सुबह जैसे ही उसकी लाश मिली, उसके घर में कोहराम मच गया।
शिवपुर डीह निवासी सुनील अपनी मां को लेकर तुर्कपट्टी थाना क्षेत्र के सपही टड़वा निवासी अपने मौसा शिवनाथ प्रसाद के घर गया था। युवक रात में घर नहीं लौटा। सुबह कसया-तमकुही रोड पर पंसरवा के पास सड़क पर उसकी बाइक और नवनिर्मित पुल में उसका शव मिला।
शव देखकर लोगों ने शोर मचाया। सुबह आठ बजे पहुंची पुलिस ने युवक के जेब की तलाशी ली तो उसमें मोबाइल और आधारकार्ड मिला। मोबाइल से नंबर निकालकर उसके घरवालों को फोन किया तो वे रोते-बिलखते पहुंचे। इन लोगों ने बताया कि युवक अपनी मां को मौसी के घर मांगलिक कार्यक्रम में पहुंचाने गया था। तब से उसका पता नहीं चल रहा था।
घरवाले जुटे थे शादी की तैयारी में, मिली लाश
कुबेरस्थान। 25 वर्षीय सुनील प्रसाद अपने माता पिता की दो संतानों में बड़ा था। उसका 10 वर्षीय भाई निकेश अभी सातवीं में पढ़ता है। सुनील के 50 वर्षीय पिता शिवपूजन मजदूरी करते हैं, जबकि उनकी 45 वर्षीय मां पानमती घर गृहस्थी का काम करती हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति पहले काफी दयनीय थी, लेकिन सुनील के बड़े होने के बाद परिजनों की उम्मीदों को भी पंख लगने लगे।
तीन वर्ष पूर्व सुनील काम के सिलसिले से विदेश चला गया और धीरे-धीरे परिवार की स्थिति सुधरने लगी। सुनील की कमाई से ही उसके परिवार की परेशानियां कम होती गईं। दो माह पूर्व ही वह विदेश से कमाकर खुशी खुशी घर लौटा था। माता-पिता ने 25 अप्रैल को ही उसकी शादी कर दी थी। बड़े बेटे की शादी की खुशियों के बारे में सोचकर पूरा परिवार काफी उत्साहित था।
इसी बीच सुनील की मौत से उसके परिवार की सारी खुशियां चकनाचूर हो गईं। सुनील के मौत की सूचना के बाद से ही उसके परिवार में कोहराम मच गया है। बड़े बेटे की मौत से आहत उसकी मां पानमती रोते रोते अचेत हो जा रही हैं, जबकि उसके पिता शिवपूजन की आंखों के आंसू भी रुकने का नाम नहीं ले रहे। छोटा भाई निकेश शव से लिपटकर रोते रोते बेसुध हो जा रहा था।