रामकोला (कुशीनगर)। शुक्रवार को मोतीपाकड़ गांव के निकट एक खेत में मिले महिला और बच्ची की सिर कटे शवों की शिनाख्त दूसरे दिन भी नहीं हो पाई। इस वजह से दोनों शवों का पोस्टमार्टम भी नहीं हो पाया है। उधर, गांव में इन दोनों की सिरकटे नग्न शव मिलने के बाद से गांववाले दहशत में हैं। इस गांव की महिलाओं और बच्चों ने दिन ढलने के बाद अपने घरों से निकलना कम कर दिया है। पुलिस पूरे दिन शवों की शिनाख्त की कोशिश में लगी रही।
रामकोला थाना क्षेत्र के मोतीपाकड़ गांव से एक किलोमीटर दूर अपना खेत देखने गए गोरख दीक्षित ने शुक्रवार को सुबह एक महिला और चार वर्ष की बच्ची का सिर कटा नग्न शव देखा था। महिला का एक पैर भी कटा था। गांव में आकर उन्होंने लोगों को बताया तो लोग उस ओर दौड़ पड़े थे। इन शवों के बारे में सुनकर एसओ भी पुलिसबल के साथ पहुंच गए थे। डॉग स्क्वॉयड भी पहुंचा, लेकिन हत्या के संबंध में कोई सुराग नहीं मिला और न ही दोनों के सिर ही मिले।
पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजने के बाद जांच शुरू कर दी थी। इस घटना और दोनों शवों की हालत देखने के बाद गांव के लोग पूरी तरह भयभीत हैं। महिलाएं और बच्चे तो शुक्रवार की शाम से ही न केवल उस ओर जाने से डर रहे हैं, बल्कि शाम होने के बाद से घरों से बाहर जाना भी कम कर दिए हैं। इधर, महिला और बच्ची का शव शनिवार को दूसरे दिन भी पोस्टमार्टम हाउस में पड़ा रहा। मोर्चरी हाउस से जुड़े लोगों ने बताया कि दोनों शवों के बारे में पेपर न आने तथा शवों की शिनाख्त न हो पाने की वजह से उन्हें सुरक्षित रखा गया है, क्योंकि पोस्टमार्टम के बाद शव जल्दी खराब होने लगता है और तब उसकी शिनाख्त काफी मुश्किल होती है।
इस संबंध में सीएमओ डॉ. अखिलेश कुमार का कहना था कि हो सकता है कि शवों के संबंध में कागजात मोर्चरी हाउस के कर्मचारियों को न मिलें हो अथवा शवों की शिनाख्त न हो पाने की वजह से पोस्टमार्टम न हुआ हो। शिनाख्त के लिए शवों को 72 घंटे तक पोस्टमार्टम हाउस में रखा जाता है, उसके बाद भी कोई न आए तब पोस्टमार्टम करा दिया जाता है।