खड्डा (कुशीनगर)। खड्डा चीनी मिल को मात्र 22 करोड़ में ही आईपीएल ग्रुप के हाथों बेचने के मामले की जांच करने जून में सीबीआई की टीम आने वाली है। जांच टीम महराजगंज जिले की सिसवा चीनी मिल की बिक्री प्रक्रिया की भी छानबीन करेगी। सीबीआई की आहट से जिम्मेदारों के हाथ पांव फूलने लगे हैं।
पिछले महीने चीनी मिलों के बिक्री घोटाले की प्रारंभिक जांच सीबीआई की लखनऊ एसीबी ने शुरू कर दी है। इस जांच के फेहरिस्त में कुशीनगर की आईपीएल चीनी मिल खड्डा व महराजगंज की चीनी सिसवा भी शामिल हैं। सीबीआई सूत्रों का कहना है कि बिक्री प्रक्रिया की गड़बड़ियां जांच का बिंदु होंगी।
मसलन चीनी मिल की स्थाई संपत्ति, बोली लगाने की प्रक्रिया में गड़बड़ी, तत्कालीन जिला प्रशासन के दायित्व, वैल्यूअर कंपनी की भूमिका, स्टांप शुल्क में गड़बड़ी आदि बिंदुओं की गहनता से जांच होगी। इसके साथ ही पर्दे के पीछे सक्रिय राजनीतिक, प्रशासनिक गठजोड़ को उजागर करना है।
उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम के अधीन खड्डा चीनी मिल का मूल्य 20.07 करोड़ लगा था और 22.05करोड़ में इंडियन पोटाश लिमिटेड के हाथों अक्टूबर 2010 में बेच दिया गया। उस समय मिल में स्थाई, अस्थायी, मौसमी कुल 566 कर्मचारी थे। विरोध के बावजूद अधिकांश को वीआरएस दे दिया गया। आईपीएल के पहले प्रबंधक ओम वर्मा तैनात किए गए। उसी समय लोगों ने मिल की बिक्री में बड़ी गड़बड़ी की आशंका जताई थी।
जांच टीम में शामिल सीबीआई के डिप्टी एसपी पीके श्रीवास्तव ने बताया कि प्रदेश की अन्य मिलों के साथ खड्डा व सिसवा चीनी मिलों की बिक्री की भी जांच चल रही है। टीम जून में खड्डा और सिसवा आने वाली है। जांच में उजागर होने के वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
मिल के पास तत्कालीन संपत्ति
मिल को छोड़कर ।27.724 हेक्टेयर जमीन की कीमत उस समय लगभग 21 करोड़ से ऊपर थी। स्टोर में लगभग दो करोड़ के उपकरण थे। गोदाम में 7320 बोरी चीनी और लगभग 4500 क्विंटल शीरा था। इसके अलावा तमाम कीमती सामान थे। इसके बाद चालू हाल में पूरा मिल था। इन सभी का मूल्य वैल्यूअर ने 20 करोड़ 7 लाख लगाया था। उसे बाइस करोड़ पांच लाख में आईपीएल ने खरीद लिया।