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बिहार बार्डर पर शुरू हुई डीजल-पेट्रोल की तस्करी..

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पेट्रोल-डीजल
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तमकुहीराज (कुशीनगर)। बिहार में शराबबंदी के बाद राजस्व घाटे को कम करने के लिए पेट्रोलियम पदार्थों पर लगाए गए अतिरिक्त वैट के कारण तेल की कीमतों में हुई वृद्घि ने तमकुहीराज क्षेत्र के तस्करों को एक और मौका दे दिया। अब तक शराब की तस्करी में लगे ये लोग अब डीजल व पेट्रोल का टैंकर भी बार्डर पार कराने लगे हैं। इसके अलावा अपने वाहनों में भी तेल भरवाने के लिए सीमावर्ती क्षेत्र के लोग कुशीनगर जिले को तवज्जो दे रहे हैं। तस्करी की यह वजह प्रति लीटर करीब छह रुपये का अंतर होना है। एक टैंकर पेट्रोल बिहार भेजने पर करीब 50 हजार रुपये तक का मुनाफा कारोबारियों को हो रहा है। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में जहां पेट्रोलियम पदार्थों की किल्लत से लोगों को जूझना पड़ रहा है, वहीं तेल तस्करों की चांदी कट रही है।
बिहार प्रांत में शराब पर पाबंदी के बाद राजस्व घाटे की भरपाई के लिए सरकार की ओर से पेट्रोलियम पदार्थो पर अतिरिक्त वैट लगाया गया है। इससे यूपी के सापेक्ष बिहार में तेल कीमतें बढ़ गई हैं। बृहस्पतिवार को यूपी में पेट्रोल पंपों पर डीजल के दाम 67.50 रुपया और पेट्रोल की कीमत 76.34 रुपये रहा। जबकि बिहार में डीजल का दाम 73.34 रुपया था, तो पेट्रोल के दाम 82.41 रुपया रहा। शराबबंदी के बाद यूपी से बिहार के लिए शराब की तस्करी हो रही है और अब पेट्रोलियम पदार्थों की भी तस्करी शुरू हो गई।
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सूत्रों की मानें तो इस काले कारोबार के पीछे कोई और नहीं बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों के पेट्रोल पंप संचालक ही शामिल हैं। उनके लिए यह कारोबार सुरक्षित और फायदा पहुंचाने वाला है। बताया जाता है कि एक टैंकर में 12 हजार लीटर तेल आता है। जिसे बिहार भेज देने पर 40 से 50 हजार रुपये की बचत हो जाती है। यही वजह है कि पेट्रोलियम पदार्थों की तस्करी के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों के पेट्रोल पंपों पर तेल नहीं होने का बोर्ड लटकता रहता है। इससे जहां वाहन चालकों को दिक्कतों को सामना करना पड़ रहा है, तो वहीं यात्री भी सवारी के लिए घंटों परेशान रह रहे हैं।
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इस संबंध में तमकुहीराज के एसडीमए त्रिभुवन का कहना है कि उन्हें इस तरह के अवैध कारनामों की जानकारी नहीं थी। अगर कोई व्यक्ति शिकायत करता है तो इसकी जांच कराई जाएगी। मामला सही पाया गया तो पेट्रोल पंप मालिकों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
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