दुदही/गौरीश्रीराम/सेवरही। झारखंड के देवघर में दर्शन कर लौट रहे गौरी जगदीश गांव के 50 से अधिक श्रद्घालुओं से भरी बस बुधवार की भोर में कोलकाता जाते समय वर्दवान जिले में हाईवे पर ट्रक से टकरा गई। दो महिला तीर्थ यात्रियों की मौत हो गई। 30 से अधिक श्रद्घालु घायल हो गए। घायलों को वर्दवान के मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। इनमें 13 की हालत चिंताजनक बताई जा रही है। तीन गंभीर घायलों कोलकाता के लिए रेफर किय गया है। अन्य श्रद्घालुओं को वर्दवान रेलवे स्टेशन पर पहुंचाया गया। हादसे के बाद घटना स्थल और श्रद्घालुओं के घरों में कोहराम मच गया गया।
सेवरही थाना क्षेत्र के गौरी जगदीश गांव और टोला बिंद टोली, सिसवनिया, शिवपट्टी, नरायनपुर सहित अन्य टोलों के 50 से अधिक श्रद्घालु तीन अगस्त को बस रिजर्व कर देवघर गए थे। वहां मंदिर में जल चढ़ाने के बाद बासुकीनाथ पहुंचकर पूजा-अर्जना की। फिर कोलकाता के काली मंदिर में पूजा कर बुधवार भोर में घर लौट रहे थे। गांव के लोगों ने बताया कि बुधवार की भोर में करीब तीन बजे वर्दवान जिले के बदरौना गांव के सामने एनएच पर बस चालक को झपकी आ गई। बस सड़क के किनारे खड़े एक ट्रक में टकरा गई। देखते ही देखते श्रद्घालुओं में चीख-पुकार मच गई। बस में सवार दो महिलाएं मीरा पत्नी पहवारी (42) और सुनैना पत्नी जंगबहादुर (50) की मौके पर मौत हो गई। 30 से अधिक श्रद्घालु घायल हो गए। पुलिस और प्रशासन ने घायल सोहन (40), रीता (30), फूलकली (50), कपिल देव (55), मार्सल (13), सोवावती देवी (45), श्वेता साह (5), बिरजानी साह (50), सुगन (7), जितेंद्र यादव (19), लिचिया देवी (45), सरोज कुमारी (17), त्रिभुवन कुमार (22), सुगंध प्रसाद (35) सहित 14 लोगों को वर्दवान के मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। इनमें सोहन, रीता और फूलकली की हालत बिगड़ने पर कोलकाता रेफर कर दिया गया। अन्य 17 लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया।
मोबाइल पर घंटी बजते ही मच गया कोहराम
सेवरही। गौरी जगदीश गांव में बुधवार को मोबाइल फोन पर घंटी बजने के बाद कोहराम मच गया। कोलकाता में हुए हादसे में दो महिला तीर्थयात्री की मौत और 30 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर से समूचा गांव दहल उठा। घायलों की सुरक्षा को लेकर लोगों की चिंताए बढ़ गईं।
गौरी जगदीश गांव के लोगों के लिए बुधवार का दिन अमंगलकारी साबित हुआ। गांव के 50 से अधिक श्रद्घालुओं की बस बर्दवान जिले में एनएच पर खड़े ट्रक में टकरा गई थी। इस दुर्घटना में कभी मरने वालों की संख्या छह, कभी तीन तो कभी दो बताई जा रही थी। इससे गांव के लोगों की बेचैनी बढ़ गई थी। दुर्घटना की खबर के बाद गांव के कई घरों में चूल्हा नहीं जला। लोग एक-दूसरे के घर जाकर परिजनों का हाल जानने का प्रयास करते रहे। छोटे बच्चे भी बड़ों को रोता देख सिर्फ टकटकी लगाकर निहार रहे थे। हर कोई सलामती की दुआ कर रहा था।
गाढ़ी कमाई से रुपये बचाकर गए थे बाबाधाम
गौरी जगदीश गांव के बिंद टोला के लोगों ने बताया कि पहवारी निषाद और जंगबहादुर के घर के लोग फूस की झोपड़ी में रहते हैं। मछली मारकर जीविका चलाते हैं। रुपये जुटाकर हर साल सावन में देवघर जल चढ़ाने जाते हैं, लेकिन इस वर्ष यात्रा इनके लिए अमंगलकारी साबित हुई।
बेटी थी कपडे़ की इंतजार में, आई मां के मौत की खबर
दुदही। बेटी तू मत जा, तोहरा के नया कपड़ा ले आईब...यह दिलासा बेटी दुर्गावती को देकर मां मीरा तीर्थयात्रा पर गई थी। मां तो नहीं आई, लेकिन फोन पर उसकी मौत की खबर आ गई। इसके बाद 13 वर्षीय बेटी दुर्गावती के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। गौरी जगदीश के बिंद टोली निवासी पहवारी के दो बेटे महेंद्र 22 व राहुल 18 तथा एक बेटी दुर्गावती 13 वर्ष की हैं। महेंद्र और राहुल परिवार के भरण-पोषण के लिए चंडीगढ़ में मजदूरी करते हैं। घर पर पहवारी, पत्नी मीरा और बेटी दुर्गावती रहती है। तीन अगस्त को जब पहवारी और पत्नी मीरा बाबाधाम जाने लगे तो बेटी साथ जाने की जिद करने लगी। मां ने दुर्गावती को दिलासा दिया कि बेटी तूं मत जा, तोहरा खातिर नया कपड़ा ले आईब, तू घर देखिह। दुर्गावती सहेलियों और पड़ोसियों से कहती थी कि मां नए कपड़े लेकर आएंगी, लेकिन बुधवार की भोर चार बजे गांव में अचानक कोहराम मच गया। दुर्गावती सोकर उठी और कुछ देर तक लोगों की बातें सुनती रही। जैसे ही उसने सुना कि मां की मौत हो गई है तो वह चीख-चीख कर रो पड़ी।