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गंडक के जलस्तर में उतार-चढ़ाव से बढ़ी चिंता

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गंडक नदी का डिस्चार्ज बड़ने से एपी बांध पर बढ़ा कटान का खतरा। - फोटो : KUSHINAGAR
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गंडक के जलस्तर में उतार-चढ़ाव से बढ़ी चिंता
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नदी का डिस्चार्ज 1.43 लाख क्यूसेक पर पहुंचा
बृहस्पतिवार को दिन में डिस्चार्ज 1.29 लाख क्यूसेक था
तमकुहीरोड। गंडक नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव के चलते इसके किनारे बसे गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है। इसके जलस्तर में उतार-चढ़ाव से कटान का खतरा बढ़ जाता है। बृहस्पतिवार को दिन में खड्डा क्षेत्र के भैसहां गेज स्थल पर नदी का जलस्तर 1.29 लाख क्यूसेक था तो रात में बढ़कर 1.43 लाख क्यूसेक पर पहुंच गया। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि खड्डा से तमकुहीराज तहसील क्षेत्र में गंडक नदी का पानी पहुंचने में 24 घंटे लगते हैं। इसलिए शुक्रवार दोपहर बाद से जलस्तर बढ़ने से लोग चिंतित हैं।
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मानसून सत्र का एक महीना से अधिक समय बीत जाने के बाद एक बार फिर गंडक के जलस्तर में उतार-चढ़ाव शुरू हो गया है। पिछले तीन दिन से जो डिस्चार्ज सवा लाख क्यूसेक के आसपास बना हुआ था, वह बृहस्पतिवार रात दस बजे अचानक बढ़ कर 1.43 लाख क्यूसेक के पार पहुंच गया। इससे अहिरौलीदान के कचहरी टोला में किलोमीटर 14.500 पर, एपी बांध के जवहीदयाल में किलोमीटर 2.600 से किलोमीटर 3.000 के बीच, नरवाजोत में किलोमीटर 1.400 से किलोमीटर 1.700 के बीच, पिपराघाट के दहारी टोला से तवकल टोला के बीच, घघवा जगदीश से चैनपट्टी के बीच सहित कई अन्य संवेदनशील जगहों पर भी पानी का दबाव व कटान का खतरा बढ़ने लगा है। तटबंधों के किनारे बसे गांवों के लोगों की चिंता बढ़ गई है। बांध किनारे बसे पुजारी सिंह, दूधनाथ शर्मा, संजय सिंह, सहदेव चौहान, जालंधर साह, प्रताप सिंह का मानना है कि गंडक का डिस्चार्ज बढ़ने-घटने का यह सिलसिला अगस्त माह के अंतिम सप्ताह तक चलेगा। ऐसे में बांध की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए तो स्थिति कभी भी बिगड़ सकती है और बांध के साथ गांवों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
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बाढ़ खंड तृतीय के एसडीओ श्रवण कुमार प्रियदर्शी का कहना है कि सभी जगह पूरी तैयारी के साथ नजर रखी जा रही है। बांध पूरी तरह सुरक्षित है।
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