पडरौना। रमज़ान के पवित्र माह में इस्लाम धर्म मानने वाले लोग रोजा रख रहे हैं। बड़े बुजुर्ग तो रोजा रख ही रहे हैं, छोटे बच्चे भी रोजा रखने में पीछे नहीं हैं। जिले के पांच वर्ष से 12 वर्ष तक बच्चे भी रोजा रखकर मुल्क की सलामती की दुआ मांग रहे हैं।
पुरैनी के टोला मुसहरी निवासी अबराल अंसारी की आठ वर्षीय बेटी सनाया खातून ने रविवार को चौथा रोजा रखा। उन्होंने बताया कि पहलेे अम्मी-अब्बू को रोजा रखते देखकर रोजा रखने का ख्याल आया। भुख-प्यास के फिक्र में हिम्मत नहीं जुटा पाती थी। इस बार अब्बू-अम्मी के मना करने बाद भी रोजा रखी हूं। इसी गांव के 12 वर्षीय हारून और पांच वर्षीय अलिसा रोजा रखने के लिए अम्मी-अब्बू के साथ उठकर सेहरी की और रोजा रखने की नियत कर ली। दोपहर होते-होते भुख-प्यास लगी तो कुछ परेशानी तो महसूस हुई, लेकिन जैसे-जैसे दिन ढ़लने गया हिम्मत बढ़ती गई और शाम को इफ्तार कर अपना रोजा मुक्कमल किया। मुसहरी निवासी ग्यासुद्दीन की बेटी जोया (9) और जहरूद्दीन के बेटे आहील (8) ने बताया कि उनका दसवां रोजा है। खुदा की इबादत में मशगूल होने के बाद रोजे की परेशानी महसूस नहीं होती है। टेकुआटार क्षेत्र के अहिरौली निवासी आस मोहम्मद के बेटे आठ वर्षीय फरहान अंसारी देखने में दुबले-पतले हैं। लेकिन इस रमज़ान में 10 रोजे रख चुके हैं। उनकी शारीरिक दशा देख अम्मी-अब्बू मना कर रहे थे। फिर भी इरादा कर लिया की रोजा रखना है।