कुशीनगर मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर के बाहर महात्मा बुद्ध की वंदना करता कंबोडियाई प्रतिनिधिमंडल।
पकवा इनार। कंबोडियाई प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को दर्शनीय स्थलों का भ्रमण किया। यहां की विशिष्टता, प्राचीनता और ऐतिहासिक महत्व को जाना। महात्मा बुद्ध की लेटी प्रतिमा, भू स्पर्श मुद्रा में बुद्ध प्रतिमा व रामाभार स्तूप के दर्शन के बाद वाराणसी रवाना हो गया।
यह प्रतिनिधि मंडल बृहस्पतिवार की देर शाम कपिलवस्तु से कुशीनगर पहुंचा था।
23 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई कर रहे पर्यटन विभाग के गाइड कुंदन कुमार ने बताया कि ‘चरथ भिक्खवे चारिकं बहुजन हिताय बहुजन सुखाय, लोकानुंपाय अत्थाय हिताय सुखाय देव मनुसानं’ बुद्ध के सूत्र वाक्य को विश्व में और प्रचारित व प्रसारित करना प्रतिनिधिमंडल के दौरे का मुख्य मकसद है। प्रदेश के बौद्ध तीर्थ स्थलों का विश्व स्तर पर प्रगाढ़ संबंध विकसित कर आध्यात्मिक व धार्मिक पर्यटन को बढ़ाना है।
उन्होंने बताया कि यह प्रतिनिधिमंडल 14 अक्टूबर से बुद्ध सर्किट में भ्रमण कर रहा है। कहा कि उत्तर प्रदेश बौद्ध स्थलों और सांस्कृतिक धरोहर के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। प्रतिवर्ष बौद्ध श्रद्धालु बड़ी संख्या में उत्तर प्रदेश आते हैं और महात्मा बुद्ध से जुड़े धार्मिक स्थलों की यात्रा करते हैं।
उन्होंने कहा यह प्रतिनिधिमंडल राज्य के बौद्ध स्थलों का दौरा कर रहा है, ताकि वे भारत के बौद्ध धरोहर को अपने देश में बढ़ावा दे सकें। कुशीनगर से पहले यह शिष्टमंडल दिल्ली पहुंचा था। जहां से आगरा का भ्रमण कर चुका है। प्रतिनिधिमंडल बीते सोमवार को प्रदेश के बुद्ध सर्किट में शामिल श्रावस्ती से आरंभ किया था। जहां से कपिलवस्तु पहुंचा था। प्रतिनिधिमंडल ने कुशीनगर के मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर में छठवीं शताब्दी की लेटी बुद्ध की भव्य प्रतिमा के समक्ष विशेष पूजा-अर्चना की है। उत्खनित अवशेषों और भव्य स्तूप की विशिष्टता की भी जानकारी ली।
इसके अलावा मांथा कुंवर मंदिर में भू स्पर्श मुद्रा में बुद्ध प्रतिमा और अंतिम संस्कार स्थल रामाभार स्तूप की बुद्ध वंदना के साथ परिक्रमा की। भव्य व शांत वातावरण में बैठकर ध्यान भी किया। यहां से प्रतिनिधि मंडल सारनाथ व वाराणसी के लिए रवाना हो गया।